Breaking News
  • सम्राट चौधरी बनेंगे CM, बिहार में BJP के पहले मुख्यमंत्री का ऐलान, नीतीश की जगह लेंगे
  • मुरैना में वनरक्षक को कुचलने वाला अहमदाबाद से गिरफ्तार, नमकीन-मिठाई बनाते पकड़ा गया
  • बिहार: आज शाम 4 बजे होगी विधायक दल की बैठक, बिहार CM पर होगा फैसला
  • महाराष्ट्र के ठाणे में सड़क हादसा, 11 की मौत: मृतकों में 3 महिलाएं, 2 की हालत गंभीर
  • I-PAC डायरेक्टर विनेश चंदेल गिरफ्तार, ED की कोयला घोटाले में कार्रवाई
  • MP और छत्तीसगढ़ में तापमान 40°C के पार, 15 अप्रैल से हीट-वेव का अलर्ट

होम > विशेष

Chiriya Web Series Sparks Debate on Marriage

मैरिटल रेप को पुश करती 'चिरैया

वेब सीरीज ‘चिरैया’ को लेकर विवाद गहराया। विवाह संस्था, मैरिटल रेप और महिलाओं के अधिकारों पर उठे सवाल, सोशल मीडिया पर पक्ष-विपक्ष में तीखी बहस।


मैरिटल रेप को पुश करती चिरैया

प्रो. मनीषा शर्मा

हिंदू विवाह संस्था का नकारात्मक चित्रण करती वेब सीरीज

शशांक शाह के निर्देशन में बनी और दिव्या दत्ता, संजय मित्रा, सरिता जोशी, फैजल रशीद और सिद्धार्थ द्वारा अभिनीत वेब सीरीज चिरैया लगातार सोशल मीडिया में सुर्खियों में बनी हुई है। 6 एपिसोड्स की यह वेब सीरीज जियो हॉट स्टार पर स्ट्रीम हुई है। इसमें  मैरिटल रेप, महिलाओं की इच्छा, है। इस वेब सीरीज में दिव्या दत्ता अर्थात कमलेश एक कम पड़ी लिखी बहू और जेठानी के रोल में हैं। जिनके बच्चे नहीं थे और उसने अपने देवर को बेटे की तरह पाला। उस देवर की शादी होती है तो कमलेश का सामना उसकी देवरानी इरा बताई गई अस्को सुहागरात और शारीरिक रिश्ते से जुड़ी कुछ बातों से होता है जिसके बाद वह अपनी देवरानी को न्याय दिलाने की ठानती है। 'चिरैया' सीरीज में हिन्दू विवाह संस्था का नकारात्मक और विकृत रूप में चित्रण किया गया है।

हिन्दू समाज में विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि धार्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का केंद्र भी है जो कर्तव्य, त्याग और पारिवारिक समन्वय पर आधारित है। यह संस्था हमारे समाज को गति, निरंतरता और सांस्कृतिक संरक्षण की आधारशिला है। किन्तु, 'चिरैया' में इस आदर्श को बड़े ही व्यवस्थित रूप से तोड़ने का प्रयत्न किया गया है और विवाह को एक बंधन, संघर्ष और रवी के जीवन में असंतोष के मुख्य स्रोत के रूप में दिखाया गया है। क्या वैवाहिक संबंधों का यही एक पक्ष है? क्या परंपरा सदैव दमन करती है? क्या आधुनिक होने का अर्थ सिर्फ हर परंपरा, हर मूल्य और सामाजिक संस्थानों जैसे परिवार, विवाह से मुक्ति है? इसके एक दृश्य में जब कमलेश और उसकी देवरानी घर छोड़कर जाने के बाद फिर से घर वापस आती है तो दादी सास कहती हैं कि अब चुप्पी को तोड़ना होगा अब चुप नहीं रहना होगा। 

सदियों तक महिलाओं को परिवार के नाम पर, प्रेम के नाम पर, परंपरा के नाम पर, संस्कारों के नाम पर बरगलाया गया है। अब समय आ गया है, इस इस चुप्पी को तोड़ने का। इस प्रकार संपूर्ण परिवार और विवाह नामक संस्था को कटघरे में खा कर दिया जाता है। यह वेब सौरीज एक दो नहीं बल्कि 12 भाषाओं तमिल, मलयालम, कन्नड़, मराठी, बंगाली, गुजराती, हरियाणवी, भोजपुरी आदि में स्ट्रीम हुई है। कुछ लोग इसे गंभीर सब्जेक्ट उठाने वाली सीरीज बता रहे हैं और कह रहे हैं की शादी के बाद रिश्ते में जबरदस्ती ऐसा ही सब्जेक्ट है जिसे समाज के सामने लाना जरुरी है। चिरैया बताती है की शादी कोई लाइसेंस नहीं है और चुष्यों को सहमति नहीं समझाना चाहिए। 

यह वेब सीरीज समाज से सवाल करती है की औरत के साथ जबरदस्ती शादी के बाद पति करें तो क्या अपराध नहीं बनता है? वहीं कुछ लोग इसे एंटी मेन प्रोपेगेंडा कहकर आलोचना कर रहे हैं। एक्स पर लड़के लिख रहे हैं कि लड़कियों को शादी से पहले 10 बॉयफ्रेंड रखने पर कोई दिक्कत नहीं पर पति रिलेशन बनाएं तो मैरिटल रेप। आज इस बात पर भी चिंता जरूर करनी चाहिए की विवाह, परिवार और रिश्तों को लेकर हम कितने कमजोर हो गए है। इस विषय पर कानून बनाना चाहिए को पुश करती यह नीरीज विवाह संस्था को जिस तरह से प्रस्तुत कर रही है उससे तो युवा लड़के-लड़कियां मन में एक अलग ही छवि बना लेंगे। 

लगातार नकारात्मक चित्रण से समाज के युवा वर्ग में विवाह के प्रति अविश्वास बढ़ सकता है। सीरीज पर जो विवाद हुआ है उसका इसे फायदा भी मिला है क्योंकि आज विवाद मार्केटिंग टूल बन गया है। आज यह चिंतन करने की जरूरत है कि जो कंटेंट इस तरह के ओटीटी प्लेटफॉर्स द्वारा परोसा जा रहा हैं वह हमारे सामाजिक ताने-बाने को, संस्कृति को, सोच को संवेदनशीलता को कितनी गहराई तक खोखला कर रहे हैं।



 

Related to this topic: