केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने ममता बनर्जी पर संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा न करने का आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल चुनाव और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर उनका विशेष बयान।
केन्द्रीय मंत्री की स्वदेश से विशेष बातचीत
पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंचती दिख रही है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से सीटों के ऐलान के बाद माहौल और ज्यादा गर्म हो गया है, लेकिन इसी बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की शिकायतों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाते हुए उन्होंने तबादलों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनका सीधा संबंध चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने से जोड़ा जा रहा है। इसी सियासी घमासान के बीच स्वदेश ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल से खास बातचीत की, जिसमें कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।
स्वदेश के सवालों का जवाब देते हुए एस.पी. सिंह बघेल ने साफ कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली कोई नई बात नहीं है। उन्होंने 1952 से अब तक के चुनावी इतिहास का हवाला देते हुए बताया कि आयोग हमेशा मेरिट और जरूरत के आधार पर अधिकारियों के तबादले करता आया है। उनके मुताबिक यह एक स्थापित प्रक्रिया है, जिसमें राज्यों से आने वाले पैनल के आधार पर ही नियुक्तियां और बदलाव किए जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के तबादलों का जिक्र किया और कहा कि ऐसे फैसले नियमित रूप से होते रहते हैं, इन्हें राजनीतिक चश्मे से देखना गलत है। बघेल ने ममता बनर्जी पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा ही नहीं है।
घुसपैठियों को मतदाता बनाकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश
उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी समय-समय पर चुनाव आयोग, सीबीआई, ईडी और यहां तक कि अदालतों पर भी सवाल उठाती रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब उनके मंत्रियों पर कार्रवाई होती है तो वह खुद सड़कों पर उतरकर विरोध करती हैं, जो उनकी कार्यशैली को दर्शाता है। बघेल के अनुसार यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसा है। पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती को लेकर भी विवाद गहराता दिख रहा है। इस पर बघेल ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से चुनाव आयोग का अधिकार है कि किस बूथ को संवेदनशील या अतिसंवेदनशील माना जाए और उसी आधार पर सुरक्षा बलों की तैनाती की जाती है। उनका कहना था कि निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी कदम है, जिससे मतदाता बिना किसी डर के मतदान कर सकें। बातचीत के दौरान ममता बनर्जी के उस बयान पर भी चर्चा हुई जिसमें उन्होंने मुस्लिम समुदाय से जुड़े फैसलों को लागू करने का वादा किया था। इस पर केंद्रीय मंत्री बघेल की ओर से आरोप लगाए गए कि यह तुष्टिकरण की राजनीति है और घुसपैठियों को वोटर बनाकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।