Breaking News
  • ICC T20 वर्ल्डकप में सबसे बड़ा उलटफेर, जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को 23 रन से हराया
  • उत्तर प्रदेश में 20 हजार पदों पर आउटसोर्स भर्तियां होंगी, 426 करोड़ बजट बढ़ा
  • कुबेरेश्वर में 14 फरवरी से रुद्राक्ष महोत्सव- रुद्राक्ष नहीं बंटेंगे, पहली बार 2.5 किमी का पैदल कॉरिडोर
  • विदिशा में 30 फीट गहरे तालाब में गिरी कार, 3 बारातियों की मौत 7 घायल
  • राजस्थान- शादी समारोह में एसिड पीने से 4 की मौत, मृतकों में तीन महिलाएं भी शामिल
  • प्रधानमंत्री ऑफिस आज सेवा तीर्थ में शिफ्ट होगा, साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट मीटिंग
  • टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की सबसे बड़ी जीत:, 47वीं बार 200+ स्कोर बनाया
  • बांग्लादेश चुनाव में BNP की जीत पर PM मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी
  • दिल्ली के कई स्कूलों को बम की धमकी, पुलिस ने जांच शुरू की

होम > विशेष

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने कहा: दूसरी शादी के लिए पहली बीवी की अनुमति की जरूरत नहीं: काउंसिल फैसला

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने कहा: दूसरी शादी के लिए पहली बीवी की अनुमति की जरूरत नहीं: काउंसिल फैसला करेगी

सोनाली मिश्रा

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने कहा दूसरी शादी के लिए पहली बीवी की अनुमति की जरूरत नहीं काउंसिल फैसला करेगी

बांग्लादेश हाईकोर्ट से एक बहुत ही हैरान करने वाला फ़ैसला आया है। मुस्लिम फैमिली लॉ के संबंध में सुनवाई करते हुए उन्होनें यह फैसला दिया कि किसी भी आदमी को अपनी दूसरी शादी के लिए अपनी पहली बीवी की इजाजत की जरूरत नहीं है। मीडिया के अनुसार कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम फैमिली लॉ ऑर्डनन्स 1961 के अनुसार किसी भी आदमी की दूसरी शादी अधिकार क्षेत्र आर्बिट्रैशन काउंसिल के पास है और अगर काउंसिल इस बात की इजाजत दे देती है तो फिर शादी कानूनी हो जाएगी, फिर चाहे पहली बीवी ने इजाजत दी हो या नहीं!

इसे लेकर बांग्लादेश में बहस छिड़ी है कि क्या मुल्क शरिया कानूनों की तरफ जा रहा है? या फिर महिलाओं के अधिकार कम कर दिए गए हैं। दरअसल बांग्लादेश में मुस्लिम आदमियों की दूसरी शादी को लेकर यह कानून है कि दूसरी शादी के विषय में आर्बिट्रैशन काउंसिल ही कोई फैसला लेगी। यदि कोई आदमी दूसरी या तीसरी शादी करना चाहता है तो उसे काउंसिल को अपना कारण बताना होगा और काउंसिल संबंधित आदमी की बात और उसकी बीवी या बीवियों की बात सुनकर ही कोई फैसला देगी।

इसे लेकर एक याचिका दायर की गई थी कि अर्बिट्रेशन काउंसिल के पास यह ताकत नहीं होनी चाहिए, क्योंकि वह पक्षपाती भी हो सकते हैं। और याचिका में यह मांग की गई थी कि किसी भी आदमी की दूसरी या तीसरी शादी के लिए उसकी पहली बीवी की इजाजत ली जाए और नए दिशानिर्देश जारी किये जाएं। इसमें यह भी था कि बीवियों के समान अधिकारों के लिए कोई भी दिशानिर्देश नहीं हैं और काउंसिल को यह भी पता नहीं लग पाता है कि क्या कोई इंसान वाकई में एक से ज्यादा बीवियों को रखने, उन्हें खाना खिलाने आदि को लेकर मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम है?

इस पर बांग्लादेश के हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया है कि किसी भी आदमी की दूसरी या अधिक शादी के लिए निर्णय केवल अर्बिट्रेशन काउंसिल ही देगी। और en.bddigest.com के अनुसार कोर्ट के 24 पन्ने के फैसले में यह भी है कि काउंसिल की इजाजत के बिना की गई दूसरी या तीसरी शादी गैरकानूनी तो नहीं है, परंतु वह एक साल की सजा या दंड के साथ दंडनीय जरूर है। 

महिला संगठन यह मांग कर रहे हैं कि कोई भी आदमी यदि दूसरी या तीसरी शादी करता है तो उसके लिए पहली बीवियों की इजाजत को जरूरी बनाया जाना चाहिए। हालांकि जहां एक तरफ महिला संगठन इस फैसले को अपने लिए धक्का मान रहे हैं तो वहीं बांग्लादेश में कई लोग ऐसे भी हैं, जो इस फैसले की बारीकियाँ बताते हुए यह कह रहे हैं कि कोर्ट ने कुछ गलत नहीं कहा है और फैसले को सही दृष्टि से पढ़ना चाहिए। मीडिया की हेडलाइन से परिणाम तक नहीं पहुंचना चाहिए।

जब इस फैसले की आलोचना होने लगी तो नोशीन नावल नामक वकील ने डेली स्टार में लिखा कि कोर्ट ने कोई नया नियम या कानून नहीं बनाया है, बल्कि कोर्ट ने याचिका खारिज की है और यह बताया है कि मुस्लिम फैमिली लॉ ऑर्डनन्स 1961 की धारा 6 के अनुसार क्या नियम है। बहरहाल en.prothomalo.com के अनुसार वकील इशरत का कहना है कि वे हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भी अपील दाखिल करेंगी!


लेखिका सोनाली मिश्रा