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हमारी छोरियां छोरों से कम है के?

हमारी छोरियां छोरों से कम है के?

राधा मिश्रा


हमारी छोरियां छोरों से कम है के

भारत की शेरनियों ने रचा इतिहास

नवी मुंबई, 2 नवंबर 2025: पूरे देश की निगाहें जब डॉ. डी.वाई. पाटिल स्टेडियम पर टिकी थीं, तब भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने वह चमत्कार कर दिखाया जिसका इंतजार सालों से था। भारत ने पहली बार ICC महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत लिया।

मैच की शुरुआत

धैर्य, पराक्रम, उत्साह और उमंग से कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल थी और भारत ने शानदार शुरुआत की। शैफाली वर्मा (87 रन) ने धमाकेदार पारी खेली, जबकि स्मृति मंधाना (45 रन) और ऋचा घोष (34 रन) ने सधी हुई पारी से उनका साथ दिया। दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 122 रन जोड़े।

मिडिल ऑर्डर में जेमिमा रोड्रिग्स (24 रन) और दीप्ति शर्मा (58 रन) ने रन गति बनाए रखी। अंतिम ओवरों में दीप्ति और राधा यादव की समझदारी से भारत ने 298/7 का मजबूत स्कोर खड़ा किया।

देशभर में उत्सव

दिल्ली से लेकर चेन्नई, मुंबई से लेकर कोलकाता तक उत्सव का माहौल रहा। लोग सड़कों पर झंडे लहरा रहे थे, ढोल बज रहे थे और सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा था 'शाबाश बेटियों'। यह सिर्फ खेल की नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण की जीत है।भारत ने 52 रनों से जीत दर्ज कर इतिहास रचा। महिला क्रिकेट का नया युग शुरू हो गया है—एक ऐसा युग जहां हर बेटी कह सकती है, “मैं भी वर्ल्ड कप जीत सकती हूं।”

सरकार और बोर्ड का नवाचार

कुछ साल पहले तक महिला क्रिकेट को उतनी पहचान नहीं मिलती थी। लेकिन भारत सरकार, बीसीसीआई और दिग्गजों जैसे सौरव गांगुली और जय शाह की नीतियों से हालात बदले। विमेंस प्रीमियर लीग ने इन बेटियों को मंच दिया, जहां सिर्फ खेल नहीं बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा। मैदान, ट्रेनिंग, वेतन और कोचिंग-सब कुछ पुरुष खिलाड़ियों के बराबर दिया गया। और नतीजा आज सामने है: भारत की बेटियां विश्व विजेता बनी हैं।

नई पीढ़ी का पराक्रम

टीम में ज्यादातर खिलाड़ी 18-19 साल की हैं, उनके चेहरे पर मासूमियत है, पर खेल में परिपक्वता। शैफाली वर्मा, ऋचा घोष, हरलीन देवल, उमा क्षेत्री, श्रीचरणी अमनजोत कौर और क्रांति गौड़ (छतरपुर, मप्र) अब हर घर में गूंजते नाम हैं। अनुभवी खिलाड़ी हरमनप्रीत कौर (36) और स्मृति मंधाना (29) ने युवाओं की मार्गदर्शक भूमिका निभाई।

पहचान में नई सोच का विस्तार

पहले लोग केवल पीटी ऊषा, पीवी सिंधु, मिताली राज, झूलन गोस्वामी, मेरीकॉम, सानिया मिर्ज़ा जैसे नाम जानते थे। अब हर भारतीय जानता है कि महिला खिलाड़ी किसी से कम नहीं।

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