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हनुमानजी के चित्र से शुरू हुआ आगर मालवा में संघ का

संघ कार्य के 100 वर्ष: मनोहर मोहर्रिर ने भूख-प्यास सहकर 85 वर्ष पहले संघ कार्य को खड़ा किया।

आगर मालवा में 1940 में हनुमानजी के चित्र से शुरू हुई संघ की पहली शाखा, भूख-प्यास सहकर खड़ा हुआ 85 वर्षों का संगठन

संघ कार्य के 100 वर्ष मनोहर मोहर्रिर ने भूख-प्यास सहकर 85 वर्ष पहले संघ कार्य को खड़ा किया।

आगर मालवा जिले में संघ कार्य की शुरुआत वर्ष 1940 से हुई थी और इस हिसाब से आगर मालवा जिले में संघ के 85 वर्ष पूरे हो चुके हैं। आगर में जब पहली शाखा 1940 में श्रीरामजी पागे और विम्बकरावजी पागे ने जमीदारपुरे में एक बाड़े में शुरू की थी, तब आज की तरह विधिवत शाखा नहीं लगती थी। लकड़े बसंत गुप्ता की एक चौकी पर स्वयंसेवक हनुमानजी का चित्र लगाते थे, फिर शाखा की शुरुआत करते थे। इसी प्रकार आगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य आरंभ हुआ।

जमीदारपुरे की यह शाखा हनुमानजी के कारण आरंभ से ही काफी सफल रही। गणवेशधारी स्वयंसेवक ध्वज के स्थान पर हनुमानजी के चित्र को प्रणाम करते थे। श्री पागे बंधुओं के साथ इस प्रथम शाखा में उनके साथी श्री रामेश्वरजी बंसल, रामकृष्णजी सोलंकी, गोविंदजी देसाई, बापूलाल देसाई, बसंतीलालजी परमार एवं रूपनारायण भटनागर आदि हुआ करते थे।

प्रथम प्रचारक के रूप में श्री मनोहररावजी मोहर्रिर का मार्गदर्शन इन स्वयंसेवकों को प्राप्त हुआ। इसके बाद उज्जैन दरवाजे के बाहर सती चबूतरे के पास शाखा लगने लगी। इसी बीच संघ को बसंतीलालजी परमार के रूप में एक समर्पित तपस्वी कार्यकर्ता मिला, जिन्होंने बड़ौद क्षेत्र में जी-तोड़ मेहनत की।

प्रथम प्रचारक मोहर्रिर के पास भोजन की भी व्यवस्था नहीं रहती थी। उस समय वे माली समाज के लोगों के खेतों में पानी की चड़स चलाकर, बदले में गाजर, मूली, प्याज या अन्य फल खाकर अपनी भूख शांत करते थे। उन्होंने कई-कई दिन भूखे रहकर संघ का कार्य किया।

प्रारंभिक स्वयंसेवक

प्रारंभिक स्वयंसेवकों में रामकृष्णजी सोलंकी, गोविंदजी देसाई, बापूलाल देसाई, बसंतीलाल परमार के बाद मध्यकाल तक सागरमल जैन, श्रीवल्लभ देसाई, गोवर्धनदास गिलड़ा, चंपालाल अजमेरा, मुरलीधर मालानी, सत्यनारायण जटिया, चंद्रहास परमार, पारस पोरवाल, सूरजमल जैन, भेरूलाल उनियारा, घूरालाल पटवारी, बंशीलाल अग्रवाल, रोडमल कुंभकार, कृष्णचंद अरोड़ा, गिरधारीलाल मालानी, पुरालाल मारू, किशनलाल गौण, कालूराम लौहार, नाथूलाल गवली, भंवरलाल जादम, प्रहलाद अजमेरा, अशोक भंडारी, अविनाश राणे, आशुतोष देसाई, गोवर्धन पालीवाल, श्रीकृष्ण शर्मा, कैलाश राठौर (शिक्षक) आदि प्रमुख रहे। इन सभी ने आने वाली पीढ़ी को मार्गदर्शन देते हुए संघ कार्य का विस्तार किया। प्रचारकों की श्रृंखला में सुरेश देशपांडे, बाबूलाल बैरागी, उमरावसिंह खटीक, रामप्रसाद आर्य, रामगोपाल शर्मा, मोहन नागर, अजय पाटीदार, गोपाल देराड़ी, अतुल माहेश्वरी, विनय दीक्षित आदि प्रमुख रहे हैं।

1942 में विधिवत शुरू हुई शाखा

17 मार्च 1942 को संघ कार्यालय के लिए बापूलालजी देसाई के मकान में शाखा लगने लगी। श्री दिगंबररावजी तिजारे उज्जैन से पैदल चलकर आगर आते थे। उनके साथ एक-दो बार राजाभाऊ महाकाल भी पैदल आए। उस समय रेल का किराया मात्र साढ़े दस आने था, लेकिन वह भी प्रचारकों के पास नहीं होता था। बसंतीलालजी परमार, गोविंदजी देसाई एवं अन्य स्वयंसेवकों ने श्री दिगंबररावजी तिजारे के साथ पैदल जयसिंहपुरा, बीजनगरी क्षेत्र में घूम-घूमकर संघ कार्य किया।

सुदर्शनजी के हुए 10 प्रवास

7 फरवरी 1948 को गांधीजी की हत्या के पश्चात संघ पर प्रतिबंध लगा। तब श्री बसंतीलाल परमार, गंगारामजी शर्मा, सागरमलजी जैन एवं अन्य कई स्वयंसेवकों ने छह माह ग्वालियर जेल में बिताए। प्रथम पीढ़ी के इन स्वयंसेवकों को सुदर्शनजी, दत्ताजी उन्नगांवकर सहित कई वरिष्ठ प्रचारकों का सानिध्य प्राप्त हुआ। प्रांत प्रचारक के रूप में सुदर्शनजी आगर में 10 बार आ चुके हैं। दत्ताजी उन्नगांवकर का बाल्यकाल भी यहीं गुजरा। बाबा आप्टे भी आगर आ चुके हैं। वरिष्ठ स्वयंसेवक बताते हैं कि 1948 में लोग काफी डरे-सहमे थे। सन् 1968 में अकाल की स्थिति में गोपाल मंदिर परिसर में अन्न क्षेत्र चलाया गया था।

“संघ तो केवल हिंदुस्थान हिंदुओं का इस ध्येय वाक्य को प्रत्यक्ष में लाना चाहता है। जैसे अन्य लोगों के अपने देश हैं, वैसे ही यह हिंदुओं का देश है।”
- डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार

 

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