हाल ही में अफगानिस्तान में नए कोड जारी किये गए थे, जिनमें महिलाओं को लेकर भी नियम थे। ये नियम बहुत ही ज्यादा सख्त थे। इन नियमों में बीवी को पीटने तक के नियम थे। इन पर काफी हंगामा भी हुआ था, मगर इस हंगामे का कोई भी असर नहीं हुआ और ये शायद लागू भी हो गए थे।
अब अफगानिस्तान से ऐसा मामला सामने आया है, जिसके कारण यह प्रतीत हो रहा है कि ये कानून शायद लागू हो ही गए हैं। उत्तरी अफगानिस्तान से यह मामला सामने आया है और यह बताने के लिए पर्याप्त है कि तालिबानी शासन में महिलाओं की क्या स्थिति है।
एक महिला तालिबानी अदालत में यह फ़रियाद लेकर गई कि उसका शौहर उसे बहुत मारता पीटता है, तो उसे तलाक दिलवा दिया जाए। मगर तालिबान की अदालत के एक जज ने उससे कहा कि छोटे-मोटे गुस्से और छोटी-मोटी पिटाई से वह मर तो नहीं जाएगी!
गार्डीअन के अनुसार फरजाना (नाम परिवर्तित) ने कहा कि उसके शौहर को बहुत जल्दी गुस्सा आता है और वह उसे बहुत पीटता है। वह उसे अक्सर बेकार कहता है और उसे शर्मिंदा करता है क्योंकि उसकी दाईं टांग बाईं टांग से थोड़ी सी छोटी है। उस महिला का कहना था कि वह अपने बच्चों की खातिर ही यह सब सहन कर रही थी, मगर एक शाम उसके सब्र का बांध टूट गया। उसका कहना था कि “एक दिन मैं बहुत बीमार थी और मुझमें रात का खाना बनाने की बिल्कुल भी हिम्मत नहीं थी। जब वह काम से घर लौटे, तो उन्होंने कहा: ‘अब तुम घर का काम भी नहीं करती?’ मैंने उन्हें बताया कि मैं बीमार हूँ, लेकिन उन्होंने मोबाइल फ़ोन के चार्जर केबल से मेरी पिटाई की। मेरी पीठ और बांहों पर कई दिनों तक चोट के निशान बने रहे, लेकिन मुझे उस समय यह नहीं सूझा कि मैं उनकी तस्वीरें ले लूँ-जो शायद किसी दिन अदालत में मेरे काम आ सकती थीं।”
और इस हमले के बाद उसने तलाक के लिए अर्जी दायर की और इस शादी को खत्म करना चाहा। मगर जब उसका मामला एक तालिबान की अदालत में पहुंचा तो फरजाना की हैरत का कोई ठिकाना नहीं रहा, जब जज ने केवल उसका दावा निरस्त ही नहीं किया, बल्कि उसके शोषण को ही नकार दिया।
फरजाना के ही शब्दों में “जब मैंने कहा कि वह मुझे मारता-पीटता है और लगातार मेरी बेइज़्ज़ती और अपमान करता है, और यह कि मैं तलाक़ चाहती हूँ, तो जज ने पूछा: ‘तुम सिर्फ़ इसी वजह से तलाक़ चाहती हो? क्या तुम्हारे पास कोई और वजह नहीं है?” जब फ़रज़ाना ने उस हमले के बारे में बताया जो उसने हाल ही में झेला था, तो उसने कहा कि जज ने पूछा कि क्या उसके पास इस ज़्यादती का कोई सबूत है।
“जब मैंने ‘नहीं’ कहा, तो उसने मुझसे कहा: ‘तुम जवान थी और अपने पति के साथ मज़े करती थी। अब जब वह बूढ़ा हो रहा है, तो तुम उससे तलाक़ लेने के बहाने ढूँढ़ रही हो ताकि तुम किसी और से शादी कर सको। वापस जाओ, तुम्हारा पति अच्छा है, उसी के साथ रहो। थोड़ा-बहुत गुस्सा और थोड़ी-बहुत मार-पीट तुम्हें मार नहीं डालेगी। इस्लाम एक मर्द को अपनी पत्नी को मारने की इजाज़त देता है, अगर वह उसकी बात न माने, ताकि उसे नियम से रहना सिखाया जा सके। जाओ, और ऐसी छोटी-मोटी बातों पर तलाक़ माँगने दोबारा मत आना।’”
यह सब उसी कोड का हिस्सा है, जो इस साल जनवरी में अदालतों ने लागू किया है। फरजाना की कहानी अकेली कहानी नहीं होगी, बल्कि यह कहानी असंख्य महिलाओं की कहानी होगी। फरजाना ने अदालत जाने का साहस किया, तो यह मामला सामने आ पाया।
हालांकि मामला सामने आने का भी कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि कानून यही कहता है कि मर्द अपनी औरत को अनुशासन सिखाने के लिए पिटाई लगा सकता है।