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Abhilash Pandey Journey: School Monitor to MLA

राजनीति में पाइथागोरस प्रमेय का इस्तेमाल कहाँ करें

पाइथागोरस प्रमेय से राजनीति तक, जबलपुर उत्तर मध्य के विधायक अभिलाष पांडे का स्कूल मॉनिटर से विधानसभा तक का संघर्ष और विचार।


राजनीति में पाइथागोरस प्रमेय का इस्तेमाल कहाँ करें

अनुराग उपाध्याय

अभिलाष पांडे का स्कूल मॉनिटर से विधायक तक का सफर

पढ़ लिखने के बाद राजनीति में आए विधायक अभिलाष पांडे कहते हैं समझ ही नहीं आता पाइथागोरस प्रमेय का इस्तेमाल कहाँ करें। इसलिए तय किया राजनीति सिर्फ सेवा और विकास के लिए है। अपने क्षेत्र और प्रदेश को कैसे उच्चतम शिखर तक पहुंचाएं, इसके लिए सहभाग करते रहते हैं।

जबलपुर उत्तर मध्य से भाजपा विधायक अभिलाष पांडे की राजनीति में आने की कोई इच्छा नहीं थी। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में कार्य कर रहे थे तभी अचानक कुछ ऐसा घटित हुआ कि वे सक्रिय राजनीति में आ गए। पांडे बताते हैं माता-पिता दोनों शिक्षक थे, हमेशा पापा का आग्रह रहता था पढ़ाई अच्छी करो। पढ़कर लिखकर नौकरी करी, काम करो। मैंने गणित की पढ़ाई की। मैंने बीएससी कंप्यूटर साइंस से किया। पत्रकारिता की डिग्री ली। लॉ की पढ़ाई की, अब कई बार राजनीति में समझ नहीं आता, पाइथागोरस कहां इस्तेमाल करें। लेकिन यह सत्य है कि 'विद्यां ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्। विद्या विनम्र भी बनाती है और आगे बढ़ाने के मार्ग भी प्रर्शत करती है। मैं ट्रेन का सफर पसंद करता हूं। सफर में नई किताबें पढ़ता हूं।

योजना थी ? इस सवाल पर विधायक अभिलाष पांडे कहते हैं में शुरू से सेवाभावी रहा। स्कूल में पढ़ता था तब क्लास मॉनिटर फिर स्कूल का मॉनिटर बना, फिर मैं स्काउट टीम में रहा. फिर मैं कॉलेज में आया तो मैं एनसीसी में रहा। कहीं ना कहीं लोगों को लीड करने का काम मुझे शुरू से मिलता रहा। फिर विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आया। परिषद् में प्रांत मंत्री की जिम्मेदारी मिली आगे बढ़ा तो मुझे युवा मोर्चे का प्रदेश उपाध्यक्ष बना दिया गया। फिर प्रदेश का महामंत्री बना। जब चुनाव का समय आया तब युवा मोर्चे का प्रदेश अध्यक्ष था। तब फिर पार्टी ने मुझे विधानसभा का टिकिट दे दिया और मैं जीत कर विधायक बन गया। अचानक राजनीति में आया तो घरवालों ने मुझे हमेशा सपोर्ट किया।

आंदोलन करने गए तो साइकिल चोरी हो गई

विधायक अभिलाष पांडे बताते हैं कि हमने खूब आंदोलन किये। एक बार आंदोलन के दौरान हम पकड़ गए, हमें जेल जाना पड़ा। एक आंदोलन के दौरान पुलिस उठाकर ले गई। हमारी साइकिल वहीं छूट गई। लौट के आए तो साइकिल चोरीहो गई। दो-तीन बार पापा ने साइकिल दिलवाई।

विधायक का चुनाव आसान रहा, यह पूछने पर विधायक पांडि ने बताया टिकट मिला तो ये बातें थी कि चुनाव जीतेंगे कि नहीं जीतेंगे। एकदम नया लड़‌का है और पुराने खिलाड़ी बहुत सारे हैं जबलपुर में। नए पुराने साथियों का साथ मिला। मेरा पूरा चुनाव जनता ने लड़ा, पूरे चुनाव का परिणाम है, कार्यकर्ताओं को समर्पित है और उनके विश्वास को समर्पित है। पांडे कहते हैं कि जबलपुर धीरे-धीरे विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। हमारे मंत्री राकेश सिंह जबलपुर में विकास के नए मॉडल पर काम कर रहे हैं। विकास के लिए हमको अभी बहुत काम करना है। अब जबलपुर में सड़क और पुलों का जाल बन रहा है ये विकास के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा, हम विरासत के साथ विकास के पक्षधर है।

पांडे कहते हैं कि जबलपुर में अभी बड़े उद्योगों की जरूरत है। उद्योग को रन करने के लिए दी चीजों की आवश्यकता होती है बिजली और पानी। यह दोनों चीजें जबलपुर में विद्यमान है, लेकिन इसके बाद भी जबलपुर का जिस तरह का उद्योगिक विकास होना चाहिए था, वो नहीं हुआ लेकिन अब मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार इस पर तेजी से काम कर रही है। 

आने वाले समय में हमारा प्रयास है औद्योगिक विकास पर हम काम करें, ताकि रोजगार की संभावनाएं बढ़े। नर्मदा के सवाल पर विधायक पांडे गंभीर हो जाते हैं और कहते हैं माँ नर्मदा स्वच्छ रहे ये हम सब की जिम्मेदारी है। नर्मदा प्रदेश की जीवन रेखा हैं। शहर बढ़ेंगे तो गंदगी भी नदियों में जाती है। नर्मदा जी का प्रताप है, जो इनके दर्शन कर ले वो पाप मुक्त हो जाता है। मैं कहता हूं कि आप सौभाग्यशाली हो कि आपको पानी की कद्र नहीं है क्योंकि आप माँ नर्मदा के तट पर है। हम नर्मदा के लिए बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं ताकि उनकी धारा अबिरल बनी रहे।

आज जो भी हूं, संघ के संस्कारों की वजह से हूं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव कैसे हुआ? यह पूछने पर पांडे ने बताया कि मैं जब सरस्वती शिशु मंदिर में पहली क्लास का विद्यार्थी था। तब एक विस्तारक हमारे गांव में आए तो उन्होंने भगवा ध्वज के सामने एकत्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रार्थना करनी है, उन्होंने बताया कि प्रणाम करो, प्रार्थना करो। बस धीरे धीरे संघ से जुड़ गया और आज जो भी हूँ, वहीं के संस्कारों की वजह से हूँ। देश की सीमाओं पर ती सैनिक खड़े हैं, दुश्मन से मुकाबले के लिए लेकिन अंदर तो सिर्फ संघ हैं। जब में विधार्थी परिषद् से जुड़ा तब तक मुझे पता नहीं था कि ये भी संघ का संगठन है।

कॉफी हाउस मेरी सबसे पसंदीदा जगह

पांडे यादों में खो जाते हुए बताते हैं, मेरी सबसे पसंदीदा जगह होती थी कॉफी हाउस। वहां हम सिंगल वड़ा या इडली लेते और भरपूर तीन तीन। चार चार चार सांभर और चटनी लेकर पेट भरते। खस्ताहाली में हम लोगों ने यह भी किया। लेकिन उसका लाभ भी मुझे हुआ क्योंकि मैं जहां से चुनाव लड़ा, वहीं से देश के कॉफी हाउस की शुरुआत हुई। सबसे ज्यादा कॉफी हाउस मेरे क्षेत्र में हैं। जब मैं चुनाव लड़ने के लिए गया तो लोगों ने कहा अभिलाष पांडे तो अपना वही लड़का है जो चटनी सांभर खाने के लिए आता था।




 

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