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अक्षय तृतीया से क्या है चार धाम यात्रा का नाता, जानिए पवित्र ग्रंथ से इसका उल्लेख

अक्षय तृतीया से क्या है चार धाम यात्रा का नाता, जानिए पवित्र ग्रंथ से इसका उल्लेख

अक्षय तृतीया के दिन से ही चार धाम की यात्रा की शुरुआत में होने वाली है। आखिर अक्षय तृतीया और चार धाम यात्रा का क्या संबंध होता है।

अक्षय तृतीया से क्या है चार धाम यात्रा का नाता जानिए पवित्र ग्रंथ से इसका उल्लेख

Akshaya Tritiya 2025: आने वाले दिन 30 अप्रैल को देश भर में अक्षय तृतीया मनाए जाने वाली है। यह वह शुभ तिथि होती है जिस मौके पर किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन से ही चार धाम की यात्रा की शुरुआत में होने वाली है। आखिर अक्षय तृतीया और चार धाम यात्रा का क्या संबंध होता है चलिए जान लेते हैं...

जानिए क्या होता है अक्षय का अर्थ

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का खास महत्व होता है। बैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, जिसे अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है। अक्षय के अर्थ को समझें तो, जिसका क्षय न हो। इसलिए इस दिन लोग कभी क्षय न होने वाली धातु सोना को बढ़-चढ़कर खरीदते हैं. कहते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन स्वर्ण की खरीदारी करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को संपन्नता और वैभव का आशीर्वाद देती हैं। किसी भी शुभ काम की शुरुआत करने के लिए यह का सबसे खास दिन होता है। साथ ही भविष्य पुराण, नारद पुराण जैसे ग्रंथों में भी अक्षय तृतीया को लेकर बताया गया है।

क्यों होती अक्षय तृतीया के दिन से चार धाम की शुरुआत

जैसा कि आपने अब तक जान लिया अक्षय तृतीया की तिथि पर कोई भी शुभ काम किए जा सकते हैं। इसलिए इन दिन चारधाम यात्रा की शुरुआत भी होती है. अक्षय तृतीया के दिन यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुल जाते हैं। चार धाम में , यमुनोत्री और गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन भक्त करते हैं। इसके अलावा अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी न ले सकें तो सुख-समृद्धि के लिए मिट्टी का बर्तन, कौड़ी, पीली सरसों, हल्दी की गांठ, रूई खरीदना बेहद शुभ रहेगा. अक्षय तृतीया के दिन दही, चावल, दूध, खीर आदि के दान का भी काफी महत्व होता है।

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