आज करें माता शीतला की पूजा, बच्चों के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए करें ये खास उपाय....
हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन माता शीतला की पूजा-आराधना को समर्पित होता है। माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान से पूजा करने और कुछ विशेष उपाय करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां भी दूर हो सकती हैं।
भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार इस साल शीतला सप्तमी का व्रत 10 मार्च, मंगलवार को मनाया जा रहा है। इस अवसर पर भक्त माता शीतला की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और संतान की लंबी आयु की कामना करते हैं।
शीतला सप्तमी की पूजा विधि
शीतला सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या किसी शीतला माता के मंदिर में जाकर पूजा करें। पूजा करते समय माता शीतला की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और उन्हें हल्दी, कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसके बाद ठंडे भोजन जैसे बासी रोटी, दही, गुड़, चावल या मीठे प्रसाद का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर माता की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
संतान से जुड़ी समस्याओं से राहत के लिए उपाय
माता शीतला को ठंडे भोजन का भोग लगाएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता को ठंडा भोजन अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से बच्चों को बीमारियों से रक्षा मिलती है और उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
बच्चों के नाम से दान करें
शीतला सप्तमी के दिन गरीबों या जरूरतमंदों को भोजन, अनाज या कपड़ों का दान करना शुभ और फलदायी माना जाता है। यह उपाय संतान के जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करने में सहायक माना जाता है।
नीम के पेड़ की पूजा करें
नीम का पेड़ माता शीतला से जुड़ा माना जाता है। इस दिन नीम के पेड़ पर जल चढ़ाकर पूजा करने से घर-परिवार को रोगों से रक्षा मिलने की मान्यता है।
घर में रखें स्वच्छता
इस दिन विशेष रूप से घर में साफ-सफाई रखें, क्योंकि माता शीतला को साफ-सफाई पसंद है।
शीतला सप्तमी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि माता शीतला विशेष रूप से रोगों से रक्षा करने वाली देवी हैं। पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दिन उनकी पूजा करने से परिवार को रोगों से मुक्ति और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा का आशीर्वाद मिलता है। कई जगह इस पर्व को बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है, जहां एक दिन पहले भोजन बनाकर अगले दिन उसी ठंडे भोजन का भोग माता को लगाया जाता है।