शनि देव को कर्म, न्याय और अनुशासन का ग्रह माना जाता है और 13 मार्च को शनि देव अस्त होने जा रहे हैं। जिसका प्रभाव विशेष रूप से कुछ राशियों पर रहने वाला है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जब कोई ग्रह अस्त अवस्था में होता है तो उसका प्रभाव कुछ समय के लिए कमजोर हो जाता है। ऐसे में जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उन्हें इस अवधि में कुछ हद तक राहत मिल सकती है।
भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार इस दौरान कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खासतौर पर मेष, वृश्चिक, धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय अपेक्षाकृत अनुकूल माना जा रहा है।
मेष राशि
मेष राशि के लोगों के लिए शनि का अस्त होना राहत देने वाला साबित हो सकता है। साढ़ेसाती के प्रभाव में कुछ कमी महसूस हो सकती है, जिससे मानसिक दबाव भी घटेगा। खर्चों पर नियंत्रण रखना आसान हो सकता है और आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होने लगेगी। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में भी गति आने के संकेत हैं। साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों में कमी और विदेश से जुड़े कामों में सफलता के योग बन सकते हैं।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय प्रगति का संकेत दे सकता है। लंबे समय से रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। किसी नए प्रोजेक्ट या बड़ी डील की संभावना भी बन सकती है।
धनु राशि
धनु राशि के लोगों को इस दौरान शनि ढैय्या से कुछ राहत मिल सकती है। लंबे समय से अटके कार्य पूरे होने लगेंगे और करियर में आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। साथ ही आर्थिक स्थिति में भी पहले से सुधार देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर यह समय धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है।
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए भी यह अवधि लाभकारी मानी जा रही है। साढ़ेसाती के प्रभाव से कुछ हद तक राहत मिल सकती है। मेहनत का अच्छा फल मिलने की संभावना है और आय के नए स्रोत भी बन सकते हैं। संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के योग हैं। इसके अलावा विदेश से जुड़े कार्यों में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
नोट: ज्योतिषीय फलादेश सामान्य मान्यताओं पर आधारित होते हैं। किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित माना जाता है।