इस साल होलिका दहन को लेकर कंफ्यूजन बना हुआ है। फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च यानी आज शाम से शुरू होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी। इसी समय भद्रा काल भी जारी रहेगा, जिससे कुछ लोग यह सोच रहे हैं कि होलिका दहन 2 मार्च को करना चाहिए या 3 मार्च को और इसका शुभ मुहूर्त क्या रहेगा?
भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, यदि लोग आज प्रदोष काल और भद्रा के दौरान होलिका दहन करना चाहते हैं, तो इसके लिए शुभ समय शाम 6:22 बजे से रात 8:53 बजे तक का माना गया है।
द्रिक पंचांग के अनुसार:
- पूर्णिमा तिथि: 2 मार्च शाम 5:55 से शुरू, 3 मार्च शाम 5:07 तक समाप्त
- भद्रा काल: 2 मार्च शाम 5:55 से 3 मार्च सुबह 5:28 तक
होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को किया जाता है और इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस दिन लोग खुले स्थान पर लकड़ी और उपलों से होलिका सजाते हैं, रोली, चावल, फूल, नारियल और नई फसल चढ़ाकर पूजा करते हैं, फिर अग्नि प्रज्वलित कर परिक्रमा करते हैं और गेहूं या चने अर्पित करते हैं। ऐसा करने से माना जाता है कि घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है।
होलिका दहन क्यों माना जाता है?
होलिका दहन की कहानी प्रह्लाद और दैत्यराज हिरण्यकश्यप से जुड़ी है। हिरण्यकश्यप खुद को ईश्वर मानता था और चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें, जबकि उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का भक्त था। उसने कई बार प्रह्लाद को मारने के प्रयास किए, लेकिन हर बार वह असफल रहा। इसके बाद हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई। लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहा और होलिका जलकर भस्म हो गई।
किन लोगों को होलिका की आग नहीं देखनी चाहिए?
माना जाता है कि जिनकी एक संतान है, उन्हें होलिका दहन होते समय इसे नहीं देखना चाहिए। नवजात और छोटे बच्चों को भी इससे दूर रखना चाहिए। जिन बच्चों का मुंडन संस्कार नहीं हुआ, उन्हें भी होलिका दहन से दूर रखना चाहिए। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं को भी इसे नहीं देखना चाहिए। नई शादीशुदा महिलाएं अपनी पहली होली अपने मायके में मनाएं।