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होली और चंद्र ग्रहण 2026

प्रेमानंद महाराज ने होली पर चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल में बचने के असरदार उपाय बताए

3 मार्च 2026 को होली के साथ चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग होगा। प्रेमानंद महाराज ने ग्रहण के दौरान सुरक्षा और आध्यात्मिक लाभ के उपाय बताए हैं।


प्रेमानंद महाराज ने होली पर चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल में बचने के असरदार उपाय बताए

इस साल होली के शुभ अवसर पर चंद्र ग्रहण लग रहा है। 3 मार्च 2026 को होने वाला यह ग्रहण सिंह राशि में होगा, और उसी दिन होलिका दहन का उत्सव भी है। इसलिए लोगों के मन में खासकर यह सवाल उठता है कि ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं?

इस संदर्भ में प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को सरल, प्रभावशाली और सुरक्षित उपाय बताए हैं। महाराज जी कहते हैं कि ग्रहण के समय डरने की जरूरत नहीं, बल्कि सावधान रहने की जरूरत है। ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए इस समय की छोटी-छोटी सावधानियों से न केवल नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल भी बढ़ाया जा सकता है।

ग्रहणकाल में क्या करें

महाराज जी बताते हैं कि इस दौरान भगवान का स्मरण करना चाहिए और निरंतर नाम जप करना चाहिए। आप अपने इष्ट देव का नाम, गुरु मंत्र या गायत्री मंत्र का जप कर सकते हैं। यह केवल नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा नहीं करता, बल्कि मन को शांत करता है और ध्यान एकाग्र करता है।

ग्रहण से पहले की तैयारी

ग्रहण शुरू होने से लगभग एक घंटा पहले स्नान कर लेना चाहिए और साफ-सुथरे कपड़े पहनना चाहिए। घर में शांत स्थान पर बैठकर मंत्र जाप करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद तुरंत अपने रोजमर्रा के काम में न लौटें। लगभग 30 मिनट तक जप जारी रखें। इसके बाद फिर स्नान करें और अपने सभी कार्य वापस शुरू करें।

महाराज ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया मन और शरीर दोनों की शुद्धि के लिए जरूरी है। यह सिर्फ धार्मिक नियम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से आपका मन और ऊर्जा स्थिर करने का तरीका है।

ग्रहण और सूतक का समय

  • चंद्र ग्रहण का समय: 3:20 PM से 6:47 PM तक

  • सूतक काल: सुबह 9:39 AM से शाम 6:46 PM तक

सूतक काल के दौरान मंदिरों के दरवाजे बंद रहते हैं और कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता। इसलिए इस पूरे समय में नाम जप और ध्यान ही सबसे उत्तम उपाय माना गया है।

इस बार का ग्रहण और होली का यह संयोग वास्तव में एक अद्वितीय अवसर है। इसे डर या चिंता का समय न मानकर, साधना, नाम जप और भगवान के स्मरण का समय समझें।

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