क्यों मनाया जाता है होलाष्टक? इन आठ दिनों में कौन से काम नहीं करना चाहिए और कौन से काम करने चाहिए। पूरी जानकारी यहां..
होली के आठ दिन पहले होलाष्टक लग जाता है, जिसमें कोई भी मंगलिक कार्य नहीं होते हैं। इस बार 24 फरवरी को मंगलवार से होलाष्टक शुरू हो रहा है। इसलिए आप भी जान लें इन दिनों में कौन से कार्य नहीं करने चाहिए।
भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार इस बार होलाष्टक 24 फरवरी को शुरू हो रहे हैं और 3 मार्च होलिका दहन तक रहेंगे। होलाष्टक को हिंदू धर्म में अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य से परहेज करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस अवधि में ग्रह उग्र अवस्था में रहते हैं और इस वजह से कोई भी नया कार्य शुभ नहीं माना जाता।
होलाष्टक में भूलकर भी न करें ये काम
- होलाष्टक के दौरान किसी भी शुभ काम से बचना चाहिए। मान्यता है कि इन आठ दिनों में भूलकर भी सगाई, नामकरण, विवाह, मुंडन और अन्य 16 संस्कार नहीं करने चाहिए।
- इस अवधि में नया वाहन, प्रॉपर्टी या मकान खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता है। इसके अलावा, ग्रहों की उग्र स्थिति के कारण इस समय नया व्यवसाय शुरू करना भी ठीक नहीं होता।
- यदि आप गृह निर्माण या नए मकान में प्रवेश करने का सोच रहे हैं, तो इसे होलिका दहन के बाद ही करें।
- ज्योतिषियों का मानना है कि नौकरी बदलना भी इस समय उचित नहीं है। अगर नौकरी बदलना अनिवार्य हो, तो पहले अपनी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी से दिखाकर सलाह लें।
- साथ ही, हवन, यज्ञ और अन्य बड़े धार्मिक अनुष्ठान इस अवधि में नहीं करवाने चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।
होलाष्टक में ये काम शुभ माने जाते हैं
होलाष्टक के आठ दिनों के दौरान जप, तप और ध्यान करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस अवधि में नियमित रूप से पूजा और ध्यान करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। मान्यता है कि प्राचीन समय में इस समय भक्त प्रहलाद ने भगवान विष्णु की अटूट भक्ति की थी। इसलिए इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा करना और उनका मंत्र ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करना लाभकारी माना जाता है।
इसके साथ ही, होलाष्टक में भगवान शिव की आराधना का भी विशेष महत्व होता है। भक्त इस समय शिवजी की पूजा करके और ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करके भोलेनाथ की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
ज्योतिषियों का मानना है कि इन आठ दिनों में उग्र ग्रहों की स्थिति के कारण जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। इसलिए इस समय किसी भी प्रकार के उपाय या पूजा में ज्योतिष की सलाह लेना फायदेमंद होता है। इससे नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
होलाष्टक क्यों माना जाता है अशुभ?
पुराणों के अनुसार, प्राचीन समय में भगवान शिव ने क्रोध में कामदेव को भस्म कर दिया था। इस घटना से सभी ग्रह उग्र हो गए थे। तब से होलाष्टक की परंपरा चली आ रही है।