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कब है फाल्गुन अमावस्या?

फरवरी में कब मनाई जायेगी अमावस्या? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

इस बार कब मनाई जायेगी फाल्गुन अमावस्या, जानिए इसका शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि

फरवरी में कब मनाई जायेगी अमावस्या जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

हिंदू धर्म में अमावस्या बेहद खास मानी जाती है। इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। लेकिन क्या आप इसकी तिथि को लेकर कंफ्यूज़ हैं कि इस बार फाल्गुण माह की अमावस्या 16 फरवरी को मनाई जाएगी या 17 फरवरी को? इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि इस बार अमावस्या कब मनाई जाएगी और कब तक रहेगी।

भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, इस बार यह अमावस्या 17 फरवरी 2026 को है। जिसकी शुरुआत 16 फरवरी की शाम से होगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पितृ दोष नष्ट होता है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। चलिए अब इसका शुभ मुहूर्त भी जान लेते हैं। 

फाल्गुन अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस बार फाल्गुन अमावस्या की तिथि और शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-

  • फाल्गुन माह अमावस्या तिथि की शुरुआत- 16 फरवरी को शाम को 05 बजकर 34 मिनट पर
  • फाल्गुन माह अमावस्या तिथि का समापन- 17 फरवरी को शाम को 05 बजकर 30 मिनट पर
  • ब्रह्म मुहूर्त- 05 बजकर 16 मिनट से 06 बजकर 07 मिनट तक
  • अमृत काल - सुबह 10 बजाकर 39 मिनट से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 28 मिनट से 03 बजकर 13 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 10 मिनट से 06 बजकर 36 मिनट तक

फाल्गुन अमावस्या पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • तांबे के लोटे में लाल फूल, अक्षत और जल डालकर सूर्य देव को अर्पित करें।
  • काले तिल और जल लेकर पितरों को तर्पण करें। इस समय आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए।
  • देसी घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें।
  • गरीबों और मंदिर में गुड़, तिल, अनाज, कंबल और धन का दान करें।

अमावस्या पर ध्यान रखने योग्य बातें

घर और मंदिर की सफाई का विशेष ध्यान रखें। इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन न करें। जितना हो सके वाद-विवाद से बचें। इस दिन बाल और नाखून न काटें। ब्रह्मचर्य का विशेष रूप से पालन करें। चलिए अब आपको पितृ मंत्र बता देते है।  

ॐ पितृ देवतायै नम:

ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्।

ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम:

ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च नम: स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नम: