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Sawan First Somwar Vrat

Sawan 2026: सावन सोमवार व्रत 3 अगस्त से शुरू होंगे, जानें पूजा का समय और क्यों है खास

सावन 2026 का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। जानें चारों सावन सोमवार की तिथियां, पूजा का शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और भगवान शिव की आराधना की सही विधि क्या है।


sawan 2026 सावन सोमवार व्रत 3 अगस्त से शुरू होंगे जानें पूजा का समय और क्यों है खास

Sawan Somwar Vrat Upwas |

हिंदू धर्म में अषाढ़ के बाद आने वाले सावन महीने का विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं और व्रत रखकर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। इस बार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ रहा है।

हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई से होगी। इसके चार दिन बाद पहला सावन सोमवार आएगा। इसी कारण इस अवधि में मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन और शिव पूजा का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बढ़ जाता है।

सावन की शुरुआत के साथ बढ़ जाती है शिव साधना

सनातन परंपरा में चातुर्मास का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और सृष्टि के संरक्षण की जिम्मेदारी भगवान शिव संभालते हैं। यही कारण है कि सावन आते ही शिव उपासना, रुद्राभिषेक, मंत्र जाप और व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। देशभर के शिव मंदिरों में इस दौरान श्रद्धालुओं की संख्या भी सामान्य दिनों से कहीं अधिक रहती है।

सावन में क्यों है सोमवार का धार्मिक महत्व?

सावन के सोमवार को भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त आराधना का दिन माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था और सावन के सोमवार का व्रत भी किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से अविवाहित लड़कियां योग्य जीवनसाथी की कामना के साथ यह व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं।

धार्मिक ग्रंथों में शिव अभिषेक का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करने पर चंद्र दोष, मंगल दोष और कालसर्प दोष जैसे ज्योतिषीय दोषों की शांति के लिए भी प्रार्थना की जाती है।

सावन सोमवार की पूरी तारीखें

साल 2026 में सावन के चार सोमवार पड़ेंगे। पहला सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा 24 अगस्त को रहेगा। इन चारों दिनों में शिवालयों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होने की परंपरा है।

सावन में पूजा के लिए शुभ समय

सावन के पहले सोमवार पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:19 बजे से 5:01 बजे तक रहेगा। वहीं, प्रातः संध्या का समय 4:40 बजे से 5:44 बजे तक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में स्नान, संकल्प और शिव पूजा करने से साधना का विशेष फल प्राप्त होता है। हालांकि श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार दिनभर भी भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन कर सकते हैं।

शिव पूजा की सरल विधि

सावन सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। यदि संभव हो तो घर के मंदिर या नजदीकी शिवालय में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद कच्चा दूध, गंगाजल, दही, शहद और घी से पंचामृत अभिषेक करें। अंत में दोबारा स्वच्छ जल चढ़ाकर अभिषेक पूर्ण करें।अभिषेक के बाद भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प और भस्म अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। व्रत कथा का श्रवण या पाठ करने के बाद आरती करें और फल, मेवा या शक्कर का भोग लगाकर पूजा संपन्न करें।

व्रत रखने वाले श्रद्धालु किन बातों का रखें ध्यान

सावन सोमवार का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मन, वचन और कर्म की शुद्धता का भी विशेष महत्व है। पूजा के दौरान क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार व्रत का पालन कर सकते हैं। पूरे दिन भगवान शिव के मंत्रों का स्मरण और सात्विक आचरण को इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

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