उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू, 18.25 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया। 19 अप्रैल को यमुनोत्री-गंगोत्री के कपाट खुलेंगे। यात्रा के नए नियम और व्यवस्थाएं लागू।
उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा शनिवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। राज्य सरकार और प्रशासन ने यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। इस बार यात्रा शुरू होने से पहले ही श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। अब तक 18.25 लाख लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश से 10 बसों को हरी झंडी दिखाकर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के लिए रवाना किया। ये श्रद्धालु 19 अप्रैल को कपाट खुलने के मौके पर मौजूद रहेंगे।

19 अप्रैल को खुलेंगे यमुनोत्री-गंगोत्री के कपाट
चारधाम यात्रा के पहले चरण में 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खोले जाएंगे। इसके बाद केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे।पिछले साल की तुलना में इस बार शुरुआती रजिस्ट्रेशन संख्या थोड़ी कम है। वर्ष 2025 में करीब 23 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया था। हालांकि प्रशासन को उम्मीद है कि यात्रा के दौरान यह संख्या तेजी से बढ़ेगी।
ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की भी सुविधा शुरू
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ सरकार ने ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन काउंटर भी शुरू कर दिए हैं। ऋषिकेश और हरिद्वार में गुरुवार से ये काउंटर संचालित हो रहे हैं।मध्य प्रदेश के शहडोल से आए करीब 100 श्रद्धालुओं ने सबसे पहले ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराया। ये यात्री यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के दर्शन करेंगे।
चारधाम यात्रा के लिए लागू किए गए 5 प्रमुख नियम
- बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक रहेगी। केवल हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्म के अनुयायी दर्शन कर सकेंगे।
- केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालु गंगाजल और फूल नहीं चढ़ा सकेंगे। विशेष पूजा दोपहर के बजाय रात 11 बजे से सुबह 4 बजे के बीच कराई जाएगी।
- यात्रा मार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक ही होगी। इसके बाद चेकपोस्ट पर रोक लगाई जाएगी।
- केदारनाथ पैदल यात्रा से पहले बुजुर्ग और बीपी मरीजों की गौरीकुंड में स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है।
- यात्रा मार्ग को 16 सुपर जोन में विभाजित किया गया है। 54 हजार वाहनों के लिए 118 पार्किंग स्थल बनाए गए हैं।
आपदा प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने 48 हाल्टिंग पॉइंट तैयार किए हैं, जहां जरूरत पड़ने पर 1.18 लाख लोगों को ठहराया जा सकता है।इसके अलावा भूस्खलन संभावित 80 स्थानों की पहचान की गई है, जहां इमरजेंसी टीमें तैनात की गई हैं। यह कदम यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।चारधाम यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहती है। इस बार भी प्रशासन और सरकार की तैयारियों के बीच यात्रा के सफल संचालन पर सभी की नजरें टिकी हैं।