मार्च में कब से शुरू होगी चैत्र नवरात्रि और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है? जान लीजिए पूरी डिटेल..........
हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह नवरात्रि देवी दुर्गा की उपासना के लिए समर्पित होती है और इसे आध्यात्मिक रूप से साल की नई शुरुआत भी कहा जाता है। इसलिए इसी दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है।
कब से शुरू होंगे नवरात्र?
इस साल चैत्र मास की नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक रहेंगी। इस दौरान पूरे नौ दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। अंतिम दिन राम नवमी का पर्व मनाकर नवरात्रि का समापन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नौ दिनों में की गई पूजा, व्रत और साधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शक्ति और समृद्धि का आगमन होता है। इन दिनों को भक्ति, संयम और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना या कलश स्थापना की जाती है। यह देवी शक्ति को घर में आमंत्रित करने का प्रतीक माना जाता है। जिसका शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 10 मिनट से शुरू होकर 8 बजकर 35 मिनट तक रहेगा और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। अगर आप सुबह कलश स्थापना नहीं कर पाए, तो अभिजीत मुहूर्त में कर सकते हैं। इस दिन मिट्टी के पात्र में जौ बोने की परंपरा है। जिसे समृद्धि और उन्नति का संकेत माना जाता है।

नवरात्रि के नौ दिनों में पूजे जाने वाले देवी के स्वरूप
चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है।
19 मार्च – मां शैलपुत्री
20 मार्च – मां ब्रह्मचारिणी
21 मार्च – मां चंद्रघंटा
22 मार्च – मां कूष्मांडा
23 मार्च – मां स्कंदमाता
24 मार्च – मां कात्यायनी
25 मार्च – मां कालरात्रि
26 मार्च – मां महागौरी (दुर्गा अष्टमी)
27 मार्च – मां सिद्धिदात्री (राम नवमी)

घर में ऐसे करें कलश स्थापना
नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान के बाद पूजा स्थान को साफ किया जाता है। इसके बाद चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मिट्टी के बर्तन में जौ डाले जाते हैं। उस पर जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है और ऊपर नारियल तथा आम के पत्ते रखे जाते हैं। फिर देवी दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर रखकर विधि-विधान से पूजा की जाती है।

नई शुरुआत का प्रतीक है यह पर्व
चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु की शुरुआत और नए उत्साह का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान मां दुर्गा की भक्ति करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है। इसी कारण कई लोग इस अवधि में नए कार्य या व्यापार की शुरुआत भी करते हैं।