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चैत्र नवरात्र कब है 2026

चैत्र नवरात्र कब है? 72 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें घटस्थापना का सही मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि में बनने जा रहा है विशेष संयोग, जान लें किस समय घटस्थापना करने से मिलेगा विशेष लाभ और घर में आएगी धन की वृद्धि


चैत्र नवरात्र कब है 72 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग जानें घटस्थापना का सही मुहूर्त

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस साल चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाए जाएंगे। नवरात्र के पहले दिन यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर विधि-विधान के साथ कलश स्थापना (घटस्थापना) की जाती है और नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है।

भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार इस बार चैत्र नवरात्र में एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो करीब 72 साल बाद देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि घटस्थापना के समय अमावस्या तिथि का प्रभाव भी रहेगा, जिससे इस नवरात्र का महत्व और बढ़ जाता है।

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घटस्थापना की तिथि और समय

पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 20 मार्च को तड़के 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या तिथि में होगा, इसलिए घटस्थापना के समय अमावस्या का प्रभाव भी माना जाएगा। इसलिए स्थापना का शुभ मुहूर्त जरूर जान लें।

घटस्थापना के शुभ मुहूर्त

19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो प्रमुख शुभ मुहूर्त हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। अगर आप इस समय में स्थापना न कर पाएं, तो दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 5 मिनट से शुरू होगा, जो 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में भी आप घटस्थापना कर सकते हैं। इन शुभ समय में कलश स्थापना करना विशेष फलदायी माना गया है।

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नवरात्र में बनने वाले शुभ योग

इस बार घटस्थापना के दिन कई महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योग भी बन रहे हैं।

  • शुक्ल योग – 19 मार्च की सुबह से शुरू होकर रात 1:17 बजे तक रहेगा।
  • ब्रह्म योग – 19 मार्च की रात 1:17 बजे से शुरू होकर अगले दिन तक प्रभावी रहेगा।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग – 20 मार्च को सुबह 4:05 बजे से 6:25 बजे तक रहेगा।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन योगों में किए गए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं।

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नौ दिनों में होगी मां दुर्गा के इन स्वरूपों की पूजा

  • पहला दिन (19 मार्च) – मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना
  • दूसरा दिन (20 मार्च) – मां ब्रह्मचारिणी की आराधना
  • तीसरा दिन (21 मार्च) – मां चंद्रघंटा की पूजा
  • चौथा दिन (22 मार्च) – मां कुष्मांडा की आराधना
  • पांचवां दिन (23 मार्च) – मां स्कंदमाता की पूजा
  • छठा दिन (24 मार्च) – मां कात्यायनी की आराधना
  • सातवां दिन (25 मार्च) – मां कालरात्रि की पूजा
  • आठवां दिन (26 मार्च) – मां महागौरी की पूजा
  • नौवां दिन (27 मार्च) – मां सिद्धिदात्री की आराधना

इसके बाद 28 मार्च को पारण के साथ नवरात्र का समापन किया जाएगा। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।

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