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Badrinath Temple Opens After 149 Days

149 दिन बाद खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट, श्रद्धालुओं में उत्साह; घृत कंबल से अनुकूल मौसम के संकेत

149 दिन बाद बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले। सीएम धामी और शंकराचार्य ने किए दर्शन, घृत कंबल से मौसम अनुकूल रहने के संकेत। चारधाम यात्रा पूरी तरह शुरू।


149 दिन बाद खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं में उत्साह घृत कंबल से अनुकूल मौसम के संकेत

उत्तराखंड के प्रसिद्ध Badrinath Temple के कपाट 149 दिनों के बाद गुरुवार सुबह विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। सुबह 6:15 बजे जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, सबसे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए। 

श्रद्धालुओं की भारी भीड़, हजारों पहुंचे दर्शन को

कपाट खुलने के समय मंदिर परिसर में करीब 2 हजार श्रद्धालु मौजूद थे, जबकि पूरे दिन में लगभग 7 हजार लोगों के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान जताया गया है। कपाट खुलते ही ‘जय बद्रीविशाल’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

अखंड ज्योति के दर्शन से शुरू हुई पूजा प्रक्रिया

परंपरा के अनुसार सबसे पहले छह माह से निरंतर जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए गए। इसके बाद भगवान की मूर्ति से घृत कंबल हटाया गया और नियमित पूजा-अर्चना शुरू हुई।

घृत कंबल से मिले शुभ संकेत

बद्रीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार इस वर्ष घृत कंबल घी से पूर्ण रूप से संतृप्त और सुरक्षित मिला है। इसे आने वाले समय में अनुकूल मौसम, अच्छी फसल और समृद्धि का संकेत माना जाता है।

क्या है घृत कंबल की परंपरा

घृत कंबल माणा गांव की कुंवारी कन्याओं द्वारा विशेष विधि से तैयार किया जाता है। इसे शुद्ध घी में डुबोकर भगवान बद्रीविशाल की मूर्ति को कपाट बंद होने से पहले ओढ़ाया जाता है। कपाट खुलने पर इसकी स्थिति के आधार पर वर्षभर के मौसम और कृषि के संकेतों का आकलन किया जाता है।

चारधाम यात्रा हुई पूर्ण रूप से शुरू

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही Char Dham Yatra के सभी चार धाम अब श्रद्धालुओं के लिए खुल चुके हैं। इससे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट 19 अप्रैल को तथा केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोले गए थे।

सरकार ने किए बेहतर प्रबंधन के दावे

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से यात्रा नियमों का पालन करने की अपील भी की।

रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं की उम्मीद

पिछले वर्ष 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने चारधाम यात्रा की थी। इस बार अब तक 21 लाख से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण करा लिया है, जिससे इस सीजन में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

 

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