मंडला के मनेरी हत्याकांड में छह लोगों की हत्या के दोषी हरीश सोनी को अदालत ने विरल से विरलतम मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।
मंडलाः मध्य प्रदेश के मंडला जिले में बहुचर्चित मनेरी हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायालय निवास ने छह लोगों की नृशंस हत्या के मामले में हरी उर्फ हरीश सोनी को ‘विरल से विरलतम’ अपराध मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। यह निर्णय न्यायाधीश प्रवीण कुमार सिन्हा ने गुरुवार को सुनाया।
2020 का दिल दहला देने वाला हत्याकांड
मामला थाना बीजाडांडी के ग्राम मनेरी का है। अभियोजन के अनुसार 15 जुलाई 2020 को पारिवारिक रंजिश के चलते हरी उर्फ हरीश सोनी और उसके भाई संतोष सोनी ने तलवार और कुल्हाड़ी से हमला कर भाजपा नेता राजेंद्र (रज्जन) सोनी समेत छह लोगों की हत्या कर दी थी। मृतकों में राजेंद्र सोनी की पुत्री रानू, विनोद सोनी, विनोद के दो मासूम बच्चे ओम (8 वर्ष) और श्रीयांस (6 वर्ष) तथा दिनेश सोनी शामिल थे।
इस हमले में नितिन सोनी, प्रमोद सोनी, रिकी सोनी, सानू तिवारी और सुनील तिवारी गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था।
पुलिस पर भी किया था हमला
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपितों ने पुलिस दल पर भी हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में संतोष सोनी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हरीश सोनी को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया गया। मामले को सनसनीखेज श्रेणी में दर्ज कर विस्तृत विवेचना के बाद न्यायालय में चालान पेश किया गया।
अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मृत्युदंड और छह मामलों में कुल 3000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। धारा 307 के पांच मामलों में क्रमिक आजीवन कारावास व 2500 रुपये जुर्माना, धारा 449 में 10 वर्ष सश्रम कारावास व 500 रुपये जुर्माना तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी) के तहत दो वर्ष कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड लगाया गया। कुल मिलाकर 7000 रुपये का अर्थदंड निर्धारित किया गया।
अभियोजन और जांच टीम की भूमिका
प्रकरण में अभियोजन का संचालन सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी उज्ज्वला उईके ने किया। विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी सुदर्शन टोप्पो और मर्ग जांच चौकी प्रभारी एसएस उसराठे ने की। सुनवाई के दौरान साक्षियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में पुलिस टीम ने अहम भूमिका निभाई।