उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी है। 6 नए मंत्रियों के नाम चर्चा में हैं। जानिए किसे मिल सकती है टीम योगी में जगह और क्या होगा राजनीतिक असर।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 10 मई, रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं। राजनीतिक हलकों में इसे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक इस विस्तार में करीब 6 नए चेहरों को योगी कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। साथ ही कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में यह कदम सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
मिशन 2027 की तैयारी में भाजपा का बड़ा दांव
भाजपा इस कैबिनेट विस्तार को ‘मिशन 2027’ की शुरुआत के तौर पर देख रही है। पार्टी का फोकस उन जातीय और सामाजिक वर्गों पर है जो फिलहाल राजनीतिक रूप से असंतुष्ट माने जा रहे हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जातीय संतुलन हमेशा से राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वर्गों को साधने की कोशिश इस विस्तार में साफ नजर आ रही है। जानकारों का मानना है कि भाजपा चुनाव से पहले एक मजबूत सामाजिक संदेश देना चाहती है, ताकि सत्ता विरोधी माहौल को कम किया जा सके।
किन चेहरों को मिल सकता है मौका?
सूत्रों के अनुसार जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा है उनमें मनोज पांडेय, पूजा पाल, कृष्णा पासवान, भूपेन्द्र चौधरी, अशोक कटारिया और रोम साहनी शामिल हैं। मनोज पांडेय ब्राह्मण समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और सपा से भाजपा में आए हैं। वहीं पूजा पाल ओबीसी वर्ग से आती हैं और महिला प्रतिनिधित्व के तौर पर उन्हें अहम माना जा रहा है।
कृष्णा पासवान दलित समुदाय से आती हैं, जबकि भूपेन्द्र चौधरी को जाट समीकरण को साधने के लिए अहम चेहरा माना जा रहा है। अशोक कटारिया संगठन कोटे से जगह पा सकते हैं। फिलहाल इन नामों को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इन्हें लेकर चर्चा तेज है।
जातीय समीकरण साधने की रणनीति
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय संतुलन हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। यही वजह है कि इस कैबिनेट विस्तार को सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा की कोशिश है कि हर प्रमुख वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि 2027 के चुनाव में एक मजबूत आधार तैयार किया जा सके। अब समझिए, यह सिर्फ मंत्रियों की सूची बदलने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे लंबी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है।
क्या बढ़ेगा डिप्टी सीएम का पद?
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यूपी में एक और डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो राज्य में डिप्टी सीएम की संख्या बढ़कर तीन हो जाएगी। वर्तमान में योगी सरकार में 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम संख्या 60 तक हो सकती है। ऐसे में नए चेहरों को शामिल करने की पूरी गुंजाइश बनी हुई है।
हालांकि अंतिम फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा हाईकमान के स्तर पर ही लिया जाएगा। फिलहाल सभी की नजरें रविवार के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हुई हैं, जो यूपी की राजनीति में नए समीकरण तय कर सकता है।