लखनऊ में सीएम योगी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। सपा-कांग्रेस पर नारी विरोधी आचरण का आरोप लगाया और कहा कि आधी आबादी उन्हें माफ नहीं करेगी।
लखनऊ: महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति तेज हो गई है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने संसद में हुए घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए विपक्ष के रवैये को नारी विरोधी करार दिया।
‘द्रौपदी के चीरहरण जैसा व्यवहार’
सीएम योगी ने कहा कि संसद में जिस तरह का आचरण देखने को मिला, वह “द्रौपदी के चीरहरण” जैसी स्थिति की याद दिलाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने का अवसर आया, तब विपक्ष ने बाधा उत्पन्न की। योगी ने कहा कि लोकसभा में वर्तमान में 78 महिला सांसद हैं और केंद्र सरकार इस संख्या को बढ़ाना चाहती थी। लेकिन कांग्रेस और सपा जैसे दल इस दिशा में रुकावट बने।
विपक्ष पर परिवारवाद और तुष्टिकरण का आरोप
सीएम ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी सिर्फ परिवार तक सीमित राजनीति करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए ही बिल का विरोध किया गया। इसके साथ ही योगी ने यह भी कहा कि सपा ने धर्म के आधार पर आरक्षण की बात कर संविधान की मूल भावना के विपरीत रुख अपनाया। उन्होंने शाह बानो केस और तीन तलाक जैसे मामलों का भी उल्लेख करते हुए विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
नारी शक्ति में आक्रोश का दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की महिलाओं में विपक्ष के खिलाफ गहरा आक्रोश है। उन्होंने कहा कि आधी आबादी इस व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी और आने वाले समय में इसका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं लागू की हैं। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि लाखों बेटियों को इसका लाभ मिला है।
राजनीतिक माहौल में बढ़ती बयानबाजी
महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां एक ओर बीजेपी इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति बता रहा है। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, जिससे यह साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आगामी चुनावों में अहम भूमिका निभा सकता है।