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कॉपर और एल्यूमीनियम उत्पादन को दोगुना करने का व‍िजन दस्‍तावेज तैयार…

कॉपर और एल्यूमीनियम उत्पादन को दोगुना करने का व‍िजन दस्‍तावेज तैयार…

कॉपर और एल्यूमीनियम उत्पादन को दोगुना करने का व‍िजन दस्‍तावेज तैयार…

नई दिल्ली। देश में तांबे और एल्यूमीनियम का उत्पादन अगले पांच सालों में दोगुना करने के लिए खनन मंत्रालय ने कॉपर (तांबा) और एल्यूमीनियम के विजन डाक्यूमेंट तैयार किए हैं। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने हैदराबाद में विश्व खनन कांग्रेस में कहा कि भारत को 2047 तक विकसित बनाने के लिए खनन में भी उत्पादन बढ़ाना है। लिहाजा हमने एल्युमीनियम और कॉपर का उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयारी कर ली है।

दरअसल देश में जहां एल्यूमीनियम उत्पादन का आधे से ज्यादा हिस्सा निर्यात हो जाता है, वहीं देश में कॉपर की मांग का 95 प्रतिशत हिस्सा आयात किया जाता है। लिहाजा दोनों उत्पादों में सरकार को अलग अलग तरह की अप्रोच की जरुरत थी।

कॉपर में देश में सिर्फ 5 खदानें ही उत्पादन कर रही है, जबकि बॉक्साइट की 54 खदानें हैं। ऐसे में कॉपर और एल्यूमीनियम का उत्पादन दोगुना करने के लिए सरकार को ना सिर्फ नई खदानें शुरु करनी होंगी, बल्कि इनके रिसाइक्लिंग को भी बढ़ाना होगा।

कोयला एवं खनन मंत्री श्री रेड्डी ने कहा कि एल्युमीनियम विजन दस्तावेज आत्मनिर्भर एवं संसाधन-सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और आधुनिक बुनियादी ढांचे को सक्षम बनाने में एल्यूमीनियम क्षेत्र की रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डाला।

यह दस्तावेज उद्योग के हितधारकों जैसे कि नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (नाल्को), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड, वेदांता लिमिटेड, जवाहरलाल नेहरू एल्युमीनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर (जेएनएआरडीडीसी) और एल्युमीनियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएआई), एल्युमीनियम सेकेंडरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एएसएमए) और मेटल रिसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से तैयार किया गया है।

दस्तावेज़ में 2047 तक एल्युमीनियम उत्पादन को छह गुना बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप की रूपरेखा दी गई है। यह दस्तावेज हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड, कच्छ कॉपर लिमिटेड, वेदांता लिमिटेड, इंडो-एशिया कॉपर लिमिटेड, लोहुम सहित प्रमुख हितधारकों के साथ-साथ भारतीय प्राथमिक कॉपर उत्पादक संघ (आईपीसीपीए) और अंतर्राष्ट्रीय कॉपर एसोसिएशन (आईसीए) जैसे उद्योग संघों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से विकसित किया गया था।

कॉपर विजन डॉक्यूमेंट में 2047 तक मांग में छह गुना वृद्धि की उम्मीद जताई गई है और 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन टन गलाने और शोधन क्षमता जोड़ने की योजना की रूपरेखा तैयार की गई है। यह द्वितीयक शोधन को बढ़ाने, घरेलू पुनर्चक्रण को बढ़ाने और वैश्विक भागीदारी के माध्यम से विदेशी खनिज परिसंपत्तियों को सुरक्षित करके खुले बाजार के आयात पर निर्भरता को कम करने पर केंद्रित है।

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