दहेज हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीता कौशिक ने मृतका ईश्वरवती के पति अनूप कुमार को दोषी करार दिया और सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई।
बृजेश कबीर, हरदोई: दहेज हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीता कौशिक ने मृतका ईश्वरवती के पति अनूप कुमार को दोषी करार दिया और सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अनूप को दहेज हत्या की धारा 304बी के साथ धारा 498ए और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा चार के तहत भी दोषी माना। पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में मृतका के जेठ आनंद कुमार और जेठानी सोमवती को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हत्या की धारा 302/34 के वैकल्पिक आरोप में पति अनूप कुमार को भी अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने धारा 498ए के तहत अनूप को एक वर्ष कारावास और एक हजार रुपये जुर्माना तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा चार के तहत एक वर्ष का कारावास और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
बाइक की मांग पूरी नहीं हुई तो किया कांड
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह के अनुसार, मामला वर्ष 2017 का है। सुरसा थाना क्षेत्र के खजुरहारा के लालता प्रसाद ने बेटी ईश्वरवती की शादी करीब साढ़े तीन वर्ष पहले सांडी थाना क्षेत्र के छीतेपुर मजरा आदमपुर के अनूप कुमार से की थी। आरोप था, शादी में सामर्थ्य के अनुसार दान-दहेज देने के बावजूद ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज में मोटरसाइकिल की मांग कर ईश्वरवती को प्रताड़ित करते थे।
पुलिस की अनसुनी, कोर्ट का दखल
चंदन सिंह के मुताबिक, 10 मार्च 2017 की रात करीब 10 बजे मायके पक्ष को ईश्वरवती की मौत की सूचना मिली। परिजन मौके पर पहुंचे। आरोप लगाया, ईश्वरवती के साथ मारपीट की गई और उसे जहर खिलाकर मार दिया गया। घटना के समय ईश्वरवती गर्भवती थी। पुलिस की ओर से कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए मायके पक्ष ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ और मामला सुनवाई के लिए अदालत पहुंचा।
जहर खिलाने का आरोप साबित नहीं
अभियोजन ने पति समेत ससुराल पक्ष के लोगों पर विवाहिता की हत्या का आरोप लगाया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। हत्या की धारा 302/34 के आरोप में अदालत ने माना, यह पर्याप्त रूप से साबित नहीं हो सका कि मृतका को जहर जबरन खिलाया गया था। इसके चलते पति अनूप कुमार को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया। हालांकि, दहेज हत्या के मामले में अदालत ने पति को दोषी पाया। जेठ आनंद कुमार और जेठानी सोमवती को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
एक आरोपी की हो चुकी मौत
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह के अनुसार, मामले में नामजद एक अन्य आरोपी रामलड़ैती की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई थी और उसके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।