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रवि सिहाग के बाद अब IAS अधिकारी आसिफ के. यूसुफ की बारी, जाली OBC सर्टिफिकेट से पाई नौकरी

रवि सिहाग के बाद अब IAS अधिकारी आसिफ के. यूसुफ की बारी, जाली OBC सर्टिफिकेट से पाई नौकरी

रवि सिहाग के बाद अब ias अधिकारी आसिफ के यूसुफ की बारी जाली obc सर्टिफिकेट से पाई नौकरी

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रवि सिहाग के बाद अब केरल के आसिफ के. यूसुफ चर्चा में हैं। कुछ समय पहले उन पर जाली OBC सर्टिफिकेट का उपयोग कर नौकरी पाने का आरोप लगाया गया था। अब इन आरोपों की पुष्टि हो गई है। DoPT ने केरल सरकार से आसिफ के. यूसुफ के खिलाफ उचित एक्शन लेने की बात कही है।

2016 बैच के IAS अधिकारी आसिफ के. यूसुफ ने जाली OBC प्रमाणपत्र का उपयोग करके सेवा में प्रवेश किया था। DoPT ने धोखाधड़ी की पुष्टि की है। DoPT ने केरल सरकार से अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। इस सिफारिश से जुड़ा एक लेटर अब सामने आया है। DoPT ने सुविधाजनक रूप से केरल सरकार से "उचित कार्रवाई" करने के लिए कहा है। गौरतलब है कि, आसिफ केरल के दुग्ध संघ के प्रमुख हैं - पूरे अधिकार के साथ काम कर रहे हैं।IAS Ravi Sihag

इसके पहले आईएएस रवि सिहाग चर्चा में थे क्योंकि उनके खिलाफ DoPT ने जांच बैठा दी है। रवि सिहाग ने वर्ष 2021 में IAS अधिकारी बनने से पहले UPSC क्रैक करके 2018 में IRTS और 2019 में IDAS का पद पाया था। वे IAS नहीं बन सके लेकिन 2021 तक आप जॉब करते रहे। फिर 2021 का नोटिफिकेशन आने से पहले रवि सिहाग ने IAS बनने का ठाना। आरोप है कि, उनके परिवार के पास कई हैक्टेयर जमीन थी, जिसको लैंड रिकॉर्ड के हिसाब से सिहाग के माता - पिता ने 15 जनवरी 2021 में EWS सर्टिफिकेट बनाने के लिए रिश्तेदारों में डोनेट कर दिया।

साल 2021 में यूपीएससी का नोटिफिकेशन मार्च महीने में आया इस हिसाब से EWS इनकम और एसेट सर्टिफिकेट अप्रैल 2019 से मार्च 2020 का होना चाहिए था लेकिन लैंड ट्रांसफर 2021 में हुआ। जो नियमों के विरुद्ध है। सिलेक्शन अच्छी रैंक पर हुआ इसलिए EWS लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ी लेकिन इस मामले में जांच चल रही है।