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कांवड़ियों को उपद्रवी बताने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने जनजातीय समाज को राष्ट्र से काटकर रखा -

कांवड़ियों को उपद्रवी बताने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने जनजातीय समाज को राष्ट्र से काटकर रखा - योगी आदित्यनाथ


कांवड़ियों को उपद्रवी बताने वाले वही लोग हैं जिन्होंने जनजातीय समाज को राष्ट्र से काटकर रखा - योगी आदित्यनाथ

UP News : उत्तरप्रदेश। कांवड़ियों को उपद्रवी बताने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने जनजातीय समाज को राष्ट्र से काटकर रखा। - यह बयान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन कार्यक्रम में दिया है। सीएम योगी ने इस कार्यक्रम में यह भी कहा है कि, जनजातीय समुदाय भारत का आदिसमुदाय है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, "कांवड़ यात्रा जारी है। मजदूर वर्ग से लेकर उच्च वर्ग तक, सभी सामाजिक वर्गों के लोग इस आंदोलन में शामिल हैं। एकता की एक मजबूत भावना है, और कोई भेदभाव स्पष्ट नहीं है... हालांकि, मीडिया ट्रायल हो रहा है, और कांवड़ यात्रा को बदनाम किया जा रहा है। उन्हें (कांवड़ यात्रियों को) अपराधी और आतंकवादी तक करार दिया जा रहा है। यह एक ऐसी मानसिकता को दर्शाता है जो हर तरह से भारत की विरासत को कलंकित करना चाहती है।"

'सनातन धर्म के ग्रंथों में कहीं नहीं लिखा कि, जो मंदिर जाएगा या पूजा करेगा वही हिन्दू है। हमने तो बुद्ध को भी भगवान माना है। हमने जैन धर्म को भी माना है। तो फिर आदिवासी समाज को क्यों अलग समझा जाए। जनजातीय समुदाय भारत का आदिसमुदाय है। वेद राजमहल के अंदर नहीं बल्कि जंगल में लिखे गए। हर प्राचीन ग्रन्थ एक पक्ष अरण्य कांड का रखता है। यह हमारे परंपरा का हिस्सा है। कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने हमारी परंपरा को कुंठित करने का काम किया है।'

'जब भी भारत के अंदर आजादी के आंदोलन का नेतृत्व करने की बात हुई है तो उसमें आदिवासी समुदाय अग्रणी रहा है। यह सरकार में रहे उन लोगों की कमी है जो उन तक नहीं पहुंच पाए। हम तालाब की भूमि, नदी के कैचमेंट एरिया ओर कब्जा करने में भी कोई परहेज नहीं करते लेकिन प्रकृति की ऊर्जा को किसी ने महत्त्व दिया है वह आदिवासी समाज है।'

लातों के भूत बातों से नहीं मानते

बिरसा मुंडा पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुहर्रम व्यवस्था के नाम पर लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थाओं में व्यवधान पैदा करने पर चिंता जताई। उन्होंने स्थापित ढांचों को तोड़ने के बजाय एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, हमने एक नियम बनाया। व्यवस्था के तहत ताजिया की हाइट तय सीमा से ज्यादा नहीं हो सकती। एक आयोजन के लिए तार हटवाएं, एक तबके और एक गांव - शहर को बिजली न मिले, यह तो गलत है। यह उनके साथ अन्याय है जो बिजली बिल का भुगतान कर रहे हैं। आप बिना बिल और सड़क का भुगतान किये यात्रा निकालना चाहते हैं, एक पेड़ जिसे बढ़ने में 40 से 50 साल लगे आप उसे कटवाना चाहते हैं। क्या अधिकार है आपका...जौनपुर में बड़ा ताजिया बनाया जो हाईटेंशन की चपेट में आ गया। इससे हुआ क्या? बाद में सड़क पर जाम लग गया। पुलिस ने कहा क्या करें? हमने कहा लाठी मारकर इन्हें बाहर करो क्योंकि लाठी के भूत बातों से नहीं मानते। जब हमने कहा था कि, इससे ऊंचा मत करना हाईटेंडन की चपेट में आ सकते हो तो माना नहीं अब कार्रवाई सहो।

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