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UP DGP Rajeev Krishna Report Card

एक साल बाद DGP राजीव कृष्ण का रिपोर्ट कार्ड अपराध नियंत्रण से लेकर साइबर क्राइम तक गिनाईं उपलब्धियां

DGP राजीव कृष्ण ने अपने एक साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति जारी रखने का ऐलान किया। महिला सुरक्षा, साइबर क्राइम और संगठित अपराध पर भी बड़ा दावा किया।


एक साल बाद dgp राजीव कृष्ण का रिपोर्ट कार्ड अपराध नियंत्रण से लेकर साइबर क्राइम तक गिनाईं उपलब्धियां

UP DGP Meeting |

उत्तर प्रदेश पुलिस प्रमुख राजीव कृष्ण ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर पुलिस मुख्यालय में प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण और पुलिस कल्याण से जुड़े कई आंकड़े और उपलब्धियां साझा कीं। डीजीपी ने कहा कि पिछले एक साल में पुलिस विभाग ने 10 प्रमुख प्राथमिकताओं पर फोकस किया।

डीजीपी का दावा है कि अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत लगातार कार्रवाई की गई और इसी वजह से अपराध के कई मामलों में गिरावट दर्ज हुई है। उन्होंने साफ कहा कि आने वाले समय में भी अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का अभियान जारी रहेगा।

महिला सुरक्षा को बनाया सबसे बड़ी प्राथमिकता

डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी गई। इसके लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया और महिलाओं से जुड़े अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अन्य अपराधों में 9.5 प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। पुलिस का फोकस सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा बल्कि जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने पर भी काम किया गया।

साइबर अपराध से निपटने के लिए तकनीक का सहारा

डीजीपी ने माना कि कोरोना काल के बाद साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं और यह पुलिस के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि अब तक 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध से निपटने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साइबर ठगी के मामलों में 450 करोड़ रुपये की रकम को ब्लॉक कराया गया है, जिसे देश की बड़ी कार्रवाइयों में गिना जा रहा है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर अपराधियों की पहचान और निगरानी की जा रही है, जिससे कई वांछित और फरार अपराधियों की गिरफ्तारी संभव हुई है।

पुलिसकर्मियों के कल्याण पर भी रहा जोर

राजीव कृष्ण ने पुलिस बल के भीतर कल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले या दुर्घटना का शिकार हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों को 137 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। इसके अलावा 51 हजार पुलिसकर्मियों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पुलिस परिवारों के लिए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 200 क्षमता वाले छात्रावासों की योजना पर भी काम चल रहा है। पुलिस नेतृत्व का मानना है कि बेहतर सुविधाएं मिलने से बल की कार्यक्षमता और मनोबल दोनों मजबूत होते हैं।

नए कानूनों के क्रियान्वयन पर विशेष फोकस

डीजीपी ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए बड़े स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। चार्जशीट समय पर दाखिल करने, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने और डिजिटल प्रक्रिया को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अदालतों से जारी होने वाले समन को सीधे थानों तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत मामलों में ई-समन प्रणाली लागू की जा चुकी है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

संगठित अपराध और आतंक नेटवर्क पर कड़ी नजर

प्रेसवार्ता के दौरान डीजीपी ने आतंकवाद और संगठित अपराध के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को गुमराह करने की कोशिशें बढ़ी हैं। ऐसे मामलों में एटीएस और एसटीएफ ने हाल के दिनों में 12 से 13 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजीव कृष्ण ने कहा कि आने वाले समय में संगठित अपराध और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर और अधिक प्रभावी कार्रवाई की जाएगी ताकि अपराधियों की वित्तीय ताकत को कमजोर किया जा सके और आम नागरिकों का भरोसा मजबूत बना रहे।

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