उज्जैन में सिंहस्थ कार्यों के निरीक्षण के लिए अफसर अब अलग-अलग गाड़ियों की बजाय एक ट्रैवलर बस में सफर कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे ईंधन और सरकारी खर्च में बड़ी बचत होगी।
उज्जैनः तीर्थ नगरी उज्जैन में सिंहस्थ मेले की तैयारियों के बीच जिला प्रशासन ने सरकारी खर्च और ईंधन बचत को लेकर नई पहल शुरू की है। अब अधिकारी अलग-अलग गाड़ियों के काफिले में नहीं, बल्कि एक ही ट्रैवलर बस में बैठकर निरीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं। यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशों के बाद लागू किया गया है।
प्रशासन का दावा है कि इससे न सिर्फ खर्च कम होगा, बल्कि ट्रैफिक और संसाधनों पर दबाव भी घटेगा। पहले जहां 15 गाड़ियों के जरिए रोज निरीक्षण होता था, वहीं अब वही काम एक वाहन से किया जा रहा है। इससे सरकारी सिस्टम में काम करने के तरीके को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है।
15 गाड़ियों से एक बस तक कैसे बदली व्यवस्था
सिंहस्थ कार्यों का निरीक्षण पिछले एक सप्ताह से लगातार किया जा रहा है। रोजाना कमिश्नर, कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, पीडब्ल्यूडी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी अलग-अलग वाहनों से घाट क्षेत्र पहुंचते थे।
बुधवार को पहली बार संभागायुक्त और सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र समेत करीब 15 अधिकारी एक साथ अर्बेनिया ट्रैवलर वाहन में पहुंचे। टीम ने सिंहस्थ मेले के लिए तैयार हो रहे 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र का निरीक्षण किया। प्रशासन का कहना है कि अब आगे भी सामूहिक यात्रा की यही व्यवस्था जारी रहेगी।
6750 रुपए का खर्च घटकर 250 तक पहुंचा
प्रशासन के मुताबिक पहले हर वाहन में करीब चार लीटर ईंधन खर्च हो जाता था। अधिकारियों की गाड़ियां पहले उनके निवास से घाट क्षेत्र तक जाती थीं, फिर निरीक्षण के दौरान कई घंटे तक एसी चालू रहता था। यदि 15 गाड़ियों का औसत जोड़ा जाए तो रोज करीब 6750 रुपए तक का ईंधन खर्च होता था।
ज्यादातर वाहन इनोवा श्रेणी के बताए गए हैं। इनका औसत 10 किलोमीटर प्रति लीटर माना गया। बुधवार को ट्रैवलर बस से निरीक्षण के दौरान सिर्फ ढाई लीटर डीजल खर्च हुआ। प्रशासन के अनुसार यह खर्च 250 रुपए से भी कम बैठा। हालांकि बस को 4100 रुपए प्रतिदिन किराए पर लिया गया है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि कुल मिलाकर यह व्यवस्था ज्यादा व्यावहारिक साबित होगी।
ट्रैफिक और सरकारी छवि पर भी असर
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने कहा कि पहले अधिकारियों के अलग-अलग वाहनों का काफिला निकलने से ट्रैफिक प्रभावित होता था। कई बार आम लोगों को भी असुविधा होती थी। अब एक बस में सभी अधिकारियों के साथ जाने से सड़क पर दबाव कम होगा और निरीक्षण भी ज्यादा व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।
प्रशासन इसे 'अनुकरणीय पहल' के तौर पर पेश कर रहा है। इस फैसले को सरकारी छवि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब आम जनता लगातार सरकारी खर्चों पर सवाल उठाती है, तब प्रशासन का यह कदम संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है कि बचत सिर्फ जनता के लिए नहीं, सिस्टम के भीतर भी जरूरी है।
सिंहस्थ तैयारियों पर सुबह 6 बजे से निगरानी
सिंहस्थ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी को देखते हुए प्रशासनिक टीम रोज सुबह 6 बजे से निरीक्षण कर रही है। अधिकारी घाटों से जुड़ने वाले एप्रोच रोड और सुविधाओं का जायजा ले रहे हैं। निरीक्षण के दौरान करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र में पैदल भ्रमण भी किया जा रहा है। मेला अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि एक साथ यात्रा करने से विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा। उनके मुताबिक इससे टीम भावना मजबूत होगी और फैसले लेने की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी।