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24 साल से सड़क के लिए लगा रहे थे गुहार…

24 साल से सड़क के लिए लगा रहे थे गुहार…

धमतरी के नाथूकोन्हा गांव के निवासियों को शासन-प्रशासन से नहीं मिली मदद तो खुद उतरे सड़क बनाने के लिए

24 साल से सड़क के लिए लगा रहे थे गुहार…

धमतरी। झारखंड के दशरथ मांझी की तरह धमतरी के नाथूकोन्हा गांव के निवासियों ने भी पहाड़ काटकर सड़क बना डाली। 1600 मीटर की इस सड़क के लिए गांव के लोग 24 साल से सरकारी दफ्तरों की खाक छान रहे थे, लेकिन हर दरवाजे से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।

इसके बाद ग्रामीणों ने ठान लिया कि बिना किसी सरकारी मदद के वे सड़क निर्माण करके ही रहेंगे। लिहाजा गांव के बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं सब एकजुट हुए और रापा-कुदाली लेकर पहाड़ काटने में जुट गए। जहां बड़ी चट्टाने आईं उसे हटाने के लिए ग्रामीणों ने आपस में पैसा मिलाकर जरूरत के हिसाब से जेसीबी मशीन की भी मदद ली। अंत में वह दिन भी आया जब उन्होंने पहाड़ को काटकर कच्ची सड़क का निर्माण कर लिया।

5 किलोमीटर लंबे सफर से परेशानी

दरअसल, नाथूकोन्हा गांव के ग्रामीणों को अपनी जरूरत का सामान लेने नियमित रूप से केरेगांव जाना पड़ता है। राशन, स्कूल, मेडिकल और दूसरे जरूरी काम के लिए केरेगांव आना जाना पड़ता था। इस सफर को ग्रामीण 1600 मीटर लंबे पहाड़ी रास्ते को पार करके पूरा करते थे। नाथूकोन्हा के ग्रामीणों को केरेगांव जाने के लिए दूसरी सड़क भी है, लेकिन लगभग 5 किलोमीटर लंबी सड़क इतनी लंबी और जर्जर है कि ज्यादातर ग्रामीण पहाड़ी रास्ते का ही इस्तेमाल करते हैं। ऊपर से आपातकालीन स्थिति में यह सफर और ज्यादा तकलीफ देता था। इसी वजह से ग्रामीणों ने 250 मीटर लंबे पहाड़ को काटकर सड़क बनाने की ठानी।

बारिश में बड़ी मुसीबत

नाथूकोन्हा गांव में रहने वाले करीब 140 लोगों का संपर्क बारिश के मौसम में दूसरे गांवों से टूट जाता था। सड़क जर्जर होने के कारण ग्रामीण एक तरह से गांव में ही कैद हो जाते थे। इन समस्याओं को देखते हुए ग्रामीणों ने नया रास्ता बनाया। इस सड़क के लिए ग्रामीण पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के शासन काल से ही मांग करते आ रहे थे।