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भूमि अधिग्रहण व मुआवजा नीति में बदलाव करेगी प्रदेश सरकार

भूमि अधिग्रहण व मुआवजा नीति में बदलाव करेगी प्रदेश सरकार

भूमि अधिग्रहण व मुआवजा नीति में बदलाव करेगी प्रदेश सरकार

मंत्रालय में हुई मंत्री समूह की बैठक में किसान संघ ने रखा चार गुना मुआवजे का प्रस्ताव

विकास कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण व मुआवजे के नियमों में सरकार बदलाव करने की तैयारी में है। इसके लिए गठित मंत्री समूह द्वारा लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर सुझाव लिए गए। इस दौरान किसान संघ ने किसानों की भूमि के मामले में चार गुना मुआवजे का प्रस्ताव रखा। वहीं मंत्री श्री सिंह ने मुआवजा नीति को और अधिक प्रभावी बनाए जाने का भरोसा दिलाया है। सुझाव के लिए 30 जनवरी तक की समय-सीमा तय की गई है।

बता दें कि भूमि अधिग्रहण और मुआवजा नियमों में सुधार के लिए सरकार द्वारा एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें मंत्री तुलसीराम सिलावट, मंत्री चैतन्य काश्यप सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।

अधिग्रहण की प्रत्येक प्रक्रिया किसान हितैषी होः किसान संघ

भारतीय किसान संघ ने प्रदेश में भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा को लेकर अपनी बात रखते हुए अधिग्रहण की प्रत्येक प्रक्रिया को किसान हितैषी बनाने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल में भारतीय किसान संघ की ओर से प्रमोद चौधरी (अखिल भारतीय अध्यक्ष, कृषि आर्थिक शोध संस्थान), महेश चौधरी (क्षेत्र संगठन मंत्री), कमल सिंह आंजना (प्रदेश अध्यक्ष), भरत सिंह पटेल (प्रांत संगठन मंत्री, मध्य भारत प्रांत) और प्रहलाद सिंह (प्रांत महामंत्री, महाकौशल प्रांत) शामिल थे।

इसके लिए समिति द्वारा बुधवार को मंत्रालय में बैठक बुलाई गई, जिसमें भारतीय किसान संघ के साथ-साथ चेंबर ऑफ कॉमर्स सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए और अपने सुझाव रखे। भूमि अधिग्रहण को लेकर आम जन भी ईमेल के माध्यम से 30 जनवरी तक अपने सुझाव समिति को भेज सकते हैं।

भारतीय किसान संघ ने भारत एग्रो इकोनॉमिक्स की उदयपुर बैठक में पारित भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव के संशोधन व सुझावों पर मंत्रियों से चर्चा करते हुए ज्ञापन सौंपा। संघ ने स्पष्ट कहा कि किसानों की जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनकी पीढ़ियों की आजीविका है, इसलिए भूमि अधिग्रहण की हर प्रक्रिया किसान-हितैषी होनी चाहिए।

मुआवजा विसंगति खत्म करने की कोशिश

लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में विकास योजनाओं को और अधिक गति देने के लिए भूमि की उपलब्धता बेहद आवश्यक है। यह भूमि सरकारी भी हो सकती है और निजी भी, जिसमें किसानों और आम नागरिकों की जमीन शामिल रहती है। जब निजी भूमि पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के कार्य किए जाते हैं, तो कई बार मुआवजे की राशि को लेकर विसंगतियां सामने आती हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुआवजा नीति में सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ किसानों और भूमि स्वामियों को भी उचित लाभ मिल सके। इसके लिए मुआवजे की राशि की दोबारा गणना की जा रही है।

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