उज्जैन। सावन-भादों मास की पावन बेला में उज्जैन की पवित्र धरती एक बार फिर आस्था के सागर में डूब गई, जब बाबा महाकाल की दूसरी सवारी पूरे राजसी वैभव के साथ नगर भ्रमण पर निकली। इस दिव्य अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भगवान चंद्रमोलेश्वर की पालकी के दर्शन कर विधिवत पूजन किया और डमरू बजाकर बाबा की आराधना में लीन हो गए।
इस बार की सवारी में बाबा के दो स्वरूप नगरवासियों को दर्शन देने निकले, पालकी में विराजमान भगवान श्री चंद्रमोलेश्वर, और हाथी पर विराजमान भगवान श्री मनमहेश। मान्यता है कि दोनों मुखौटे एक समान फल प्रदान करते हैं, जिससे जो भक्त पालकी दर्शन से वंचित रह जाते हैं, वे हाथी पर विराजे स्वरूप के दर्शन से भी पुण्य लाभ पा सकते हैं।
सवारी के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. राजेंद्र शुक्ल ने झांज बजाई, जबकि नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल तालियों की गूंज में महाकाल की भक्ति में मग्न नजर आए।
इस भव्य यात्रा में ‘स्वामी मुस्कुरा के मित्र मंडली’ और उनके आचार्य पं. दिनेश रावल एवं पं. मोहित गुरु भी उपस्थित रहे।
सवारी रामघाट पहुंचने पर बाबा के चंद्रमोलेश्वर स्वरूप का विशेष पूजन हुआ, जिसमें पं. आशीष गुरु के आचार्यत्व में मुख्यमंत्री ने आरती की। इसके पश्चात बाबा की सवारी नगर भ्रमण के लिए आगे बढ़ गई।
इस बार की यात्रा में पुलिस बैंड की सजीव प्रस्तुति ने विशेष आकर्षण बटोरा। बैंड की धुनों के साथ जब बाबा महाकाल की पालकी निकली, तो श्रद्धालु जयकारों से पूरा मार्ग गूंज उठा।
बाबा महाकाल की सवारी में क्या रहा विशेष?
- सीएम मोहन यादव ने डमरू बजाया, किया आरती पूजन
- डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बजाई झांझर, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बजाया मंजीरा
- बाबा के दो स्वरूपों के हुए दर्शन - पालकी और हाथी पर
- रामघाट पर चंद्रमोलेश्वर स्वरूप का विशेष पूजन
- पुलिस बैंड की धुनों ने भक्तों का मन मोह लिया
- महाकाल की भक्ति में मग्न दिखी महाकाल की नगरी उज्जैन