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नार्मदीय ब्राह्मण समाज का फूटा गुस्सा, कार्रवाई की मांग तेज…

नार्मदीय ब्राह्मण समाज का फूटा गुस्सा, कार्रवाई की मांग तेज…

नार्मदीय ब्राह्मण समाज का फूटा गुस्सा कार्रवाई की मांग तेज…

हरदा (मध्यप्रदेश): मध्यप्रदेश के हरदा जिले में एक प्राइवेट कॉलेज द्वारा विशेष प्रजाति की मुर्गी के विज्ञापन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वजह है मुर्गी की प्रजाति का नाम "नर्मदा" रखा जाना। यह नाम सामने आते ही नार्मदीय ब्राह्मण समाज ने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया है और कड़ी आपत्ति जताई है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

दरअसल, हरदा के एक पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर जारी किया, जिसमें एक नई मुर्गी प्रजाति के प्रचार के लिए उसका नाम “नर्मदा” लिखा गया था। मां नर्मदा को आराध्य मानने वाले नार्मदीय ब्राह्मण समाज ने इस पर तीव्र प्रतिक्रिया दी और कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध दर्ज कराया।

क्या कहा समाज ने?

नार्मदीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष अशोक पाराशर के नेतृत्व में लोगों ने संयुक्त कलेक्टर संजीव कुमार नागू को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया कि “मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं हैं, वे हमारी आराध्य देवी हैं। नार्मदीय समाज स्वयं को उनका मानस पुत्र मानता है। इस पावन नाम को एक मांसाहारी जीव के साथ जोड़ना हमारी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।”

प्रशासन और कॉलेज की प्रतिक्रिया

इस मामले में कॉलेज संचालक राजीव खरे ने सफाई दी है कि "नर्मदा" नाम संस्थान ने नहीं, बल्कि नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (जबलपुर) के रिसर्च विभाग द्वारा दिया गया है। उन्होंने कहा कि हरदा में यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि नाम हमारे द्वारा रखा गया, जबकि यह तथ्यात्मक रूप से गलत है।

कथा वाचक की भावुक प्रतिक्रिया

नार्मदीय समाज के प्रमुख कथा वाचक प्रफुलानंद महाराज ने भी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, “मां नर्मदा हमारे जीवन की आधारशिला हैं। उनके नाम पर मांसाहारी उत्पाद का नामकरण अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय है। यह समस्त सनातन समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।”

क्या है मांग?

समाज की मांग है कि

  • इस मुर्गी प्रजाति का नाम तुरंत बदला जाए।
  • भविष्य में देवी-देवताओं के नाम किसी मांसाहारी या व्यावसायिक उत्पाद पर न रखे जाएं।
  • सरकार इस पर स्पष्ट नीति बनाए।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या कदम उठाता है। फिलहाल समाज में रोष है और अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा विरोध आंदोलन भी खड़ा हो सकता है। 

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