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टर्सरी कैंसर केयर यूनिट के उपकरणों पर संकट, ज्वाइंट सेक्रेटरी ने जताई नाराजगी

टर्सरी कैंसर केयर यूनिट के उपकरणों पर संकट, ज्वाइंट सेक्रेटरी ने जताई नाराजगी

टर्सरी कैंसर केयर यूनिट के उपकरणों पर संकट ज्वाइंट सेक्रेटरी ने जताई नाराजगी

ग्वालियर। अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य चिकित्सालय समूह में रोजाना हजारों मरीज आते हैं। इनमें बड़ी संख्या कैंसर पीडि़तों की होती है। कैंसर जैसी घातक बीमारी से जूझ रहे इन मरीजों को अब भी बेहतर इलाज के लिए दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों की राह नापनी पड़ रही है। जबकि ग्वालियर में टर्सरी कैंसर केयर सेंटर तैयार हो चुका है। लेकिन भवन बनने के लगभग एक साल बाद भी उपकरण खरीदे नहीं गए। नतीजा यह है कि करीब 35 करोड़ रुपए का बजट लेप्स होने की कगार पर है।

जानकारी के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से 42 करोड़ की लागत का यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इसमें से सात करोड़ की लागत से भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। लेकिन 35 करोड़ के उपकरण अब तक नहीं खरीदे गए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी भी इस लापरवाही पर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना है कि यह हमारी नाकामी है कि हम आपसे काम नहीं करा पा रहे हैं। यह बयान शासन और प्रशासन की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े करता है।

मंत्रालय ने राज्य सरकार से बजट उपयोग का प्रमाण-पत्र (यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट) भी मांगा है। लेकिन उपकरण खरीदी न होने से यह सर्टिफिकेट जारी नहीं हो सका। अगर मार्च 2026 तक खरीदी नहीं हुई तो पूरा बजट लेप्स हो जाएगा और इसका खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ेगा।

2020 में होना था शुरू

टर्सरी कैंसर केयर सेंटर 2020 में शुरू होना था। निर्माण और उपकरण खरीदी का काम तय समय पर पूरा होना था। लेकिन कोरोना संक्रमण के दौरान निर्माण कार्य अटक गया। अब भवन तो खड़ा है, पर उपकरणों के बिना मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

यह होंगे अत्याधुनिक उपकरण

- लाइनर एक्सेलेरेटर मशीन: कैंसर मरीजों को आधुनिक तरीके से शिकाई।

- हाई कैपेसिटी सीटी सिम्यूलेटर मशीन: अंगों की जांच और सटीक इलाज की योजना।

- ट्रीटमेंट प्लानिंग सिस्टम: मरीज को दी जाने वाली शिकाई की डोज की गणना।

- पेट सीटी स्कैन मशीन: एमआरआई से भी उन्नत तकनीक, जिससे कैंसर की सटीक स्थिति पता चलेगी।

सवालों के घेरे में व्यवस्था

- जब भवन तैयार हो चुका है तो उपकरण खरीदी में देरी क्यों?

- शासन स्तर पर जिम्मेदार अफसर इस बजट के प्रति बेपरवाह क्यों हैं?

- मरीजों को बाहर शहर भेजने की मजबूरी कब तक रहेगी?