Breaking News
  • दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्टों की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 75वें स्थान पर पहुंचा
  • बांग्लादेश चुनाव में हिंसा- एक की मौत, दो वोटिंग सेंटर के बाहर बम धमाके
  • चांदी आज 5,835 गिरकर 2.61 लाख किलो हुई, सोना 1,175 गिरकर1.56 लाख पर आया
  • हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट में नहीं मिलेगी एंट्री
  • बांग्लादेश में चुनाव की पूर्व संध्या पर एक और हिंदू की हत्या
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राज्यसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देंगी
  • बांग्लादेश में वोटिंग जारी, सुबह-सुबह मतदान केंद्रों पर वोटर्स की लंबी कतार
  • नई श्रम संहिता के खिलाफ देशभर में हड़ताल पर ट्रेड यूनियन, आज भारत बंद

होम > प्रदेश > मध्य प्रदेश

मप्र में शिक्षकों को हर महीने मिलेगी एक अतिरिक्त छुट्टी

मप्र में शिक्षकों को हर महीने मिलेगी एक अतिरिक्त छुट्टी

मप्र में शिक्षकों को हर महीने मिलेगी एक अतिरिक्त छुट्टी

2 से ज्यादा बच्चों वाले शिक्षकों की नौकरी को भी खतरा नहीं

प्रदेश सरकार शिक्षकों को हर महीने एक अतिरिक्त अवकाश देने जा रही है। शैक्षणिक महीनों में शिक्षकों को 10 और छुट्टियां मिलेंगी। यह प्रावधान अगले साल जनवरी से लागू होगा। छुट्टियां बढ़ाने का फैसला गर्मियों में मिलने वाले अवकाशों की कम होती संख्या को देखते हुए लिया गया है।

समय के साथ ग्रीष्मकालीन अवकाश धीरे-धीरे कम होते गए और अब ये दो माह से घटकर केवल 20-22 दिन रह गए हैं। शिक्षक लंबे समय से अर्जित अवकाश का लाभ देने की मांग कर रहे थे। इसे ध्यान में रखते हुए वित्त विभाग ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 1977 के स्थान पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2025 तैयार किए हैं। इसमें शैक्षणिक संवर्ग को एक वर्ष में 10 दिवस के अर्जित अवकाश की पात्रता दी गई है।

अवकाश का नकदीकरण

इसके साथ यह प्रावधान भी किया गया है कि सेवानिवृत्ति के समय जो भी अर्जित अवकाश शेष होंगे, उनका नकदीकरण किया जाएगा। पहले पूरे सेवाकाल में 240 दिन तक अवकाश का नकदीकरण संभव था, जिसे अब बढ़ाकर 300 दिन कर दिया गया है। जटिल प्रक्रियाओं के कारण इसका पूरा लाभ पहले नहीं मिल पाता था। उधर, स्वैच्छिक अवकाश और साप्ताहिक अवकाश के नियमों में भी संशोधन प्रस्तावित है।

तीसरे बच्चे वाले कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित

सरकार ने एक और बड़ा निर्णय लिया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी का तीसरा बच्चा होता है, तो उसे अपात्र मानकर सेवा से हटाया नहीं जाएगा। 26 जनवरी 2001 से तीसरा बच्चा होने पर अपात्र मान लेने की शर्त लागू थी। छत्तीसगढ़, राजस्थान और अन्य राज्यों ने पहले ही यह शर्त हटा दी थी।

यह निर्णय स्कूल, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा सहित अन्य विभागों के कर्मचारियों के लिए लाभकारी होगा। हालांकि जिन पर पहले ही कार्रवाई हो चुकी है, उनके प्रकरणों में कोई राहत नहीं मिलेगी क्योंकि यह निर्णय भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं होगा।

बताया गया है कि इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री से मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही सामान्य प्रशासन विभाग इसे कैबिनेट में लाएगा।

Related to this topic: