ग्वालियर में स्वदेश की काव्यधारा में हास्य-व्यंग्य, कविता और नशामुक्त होली का संदेश गूंजा। कवियों ने ठहाकों के बीच सामाजिक सरोकारों पर बात रखी।
ग्वालियर में 'स्वदेश' के काव्यधारा में गूंजे ठहाके, नशामुक्त होली का दिया संदेश
सामाजिक, सांस्कृतिक सरोकारों के साथ राष्ट्रीय विचार के प्रति समर्पित देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'स्वदेश' के सोमवार को आयोजित काव्यधारा कार्यक्रम में होली का रंग बिरंगा उत्सव साकार हो उठा।
बासंती और फगुनाई रंगत में रंगे इस आयोजन में देश के प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी हास्य व्यंग्य की रचनाओं से जहां श्रोताओं को खूब गुदगुदाया, वहीं कुरीतियों और विसंगतियों पर जमकर तंज कसे। साथ ही नशा मुक्त होली का संदेश देते हुए कहा कि शराब की बोतल की एक्सपायरी डेट नहीं होती, लेकिन इसे पीने वाले जरूर जल्दी एक्सपायर हो जाते हैं। इसलिए इस बार की होली से नशा नहीं करने और दूसरों को भी नशा नहीं करने के लिए प्रेरित करें।
स्वदेश परिसर के समीप माधव मंगलम पैलेस के भव्य मंच पर हुए इस कवि सम्मेलन का शुभारंभग्वालियर की नवोदित कवयित्री व्याप्ति उमड़ेकर की सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने घनाक्षरी गीत से माहौल को बासंती और भक्तिमय कर दिया।
देखें बानगी-मन मन बासन में, स्नेह रंग भरकर।
कस्तूरी सुगंध गंध, घोले चितचोर है।
कृष्ण कृष्ण रट रट, राधा रानी दिन रत।
कृष्णरूप धर रही, सारंग विभोर है।
इसके बाद विदिशा से आए संतोष सागर ने काव्य पाठ की पिचकारी में हंसी ठिठोली के रंग भरकर रसिकों पर छोड़े तो ठहाके गूंज उठे। उन्होंने राजनीति सहित सामाजिक समस्याओं पर जमकर प्रहार किया। श्रोताओं ने भी उनकी रचनाओं में भरपूर आनंद लिया। उन्होंने परिवार, समाज और राष्ट्र में सकारात्मक बदलाव के लिए सबसे पहले स्वयं इस दिशा में पहल करने का आह्वान करते हुए कहा कि.
पहले सब के काम बनाना पड़ता है।
तब जाके ये नाम बनाना पड़ता है।
लक्ष्मण जैसा भाई तभी मिल पाता है।
पहले खुद को राम बनाना पड़ता है ।।
अयोध्या से आई कवयित्री रुचि द्विवेदी ने भी श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। देखें बानगी व्यर्थ का राग रागने वाले, बंद आंखों से जागने वाले, अप्सराएं तुम्हें मुबारक हों, हम हैं बैकुण्ठ त्यागने वाले इसके बाद उन्होंने होली आई रे आई रे होली आई रसिया, रंग रंग तेरी मन भाई रसिया सुनाकर वातावरण में होली का रस घोल दिया।
बालाघाट से आए हास्य कवि दिनेश देहाती ने भी हंसी और गुदगुदाने वाले शब्दों की बरसात कर दी। उनकी प्रत्येक पंक्ति श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए उत्साहित कर रहीं थीं। उन्होंने अपने चुटीले अंदाज में श्रोताओं को बांधने का काम किया। उन्होंने अपने अंदाज में व्यंग्यों के माध्यम से जमकर कटाक्ष किए। उन्होंने कहा किमस्त रहते हैं मस्ती में कभी हमारा चेक अप नहीं होता, पसीने से लथपथ माथे पर बनावटी मेकअप नहीं होता। लड़ते हैं और झगड़ते हैं फिर एक हो जाते हैं। हम देहातीयों के जीवन में कभी ब्रेक अप नहीं होता।।
रंगोत्सव में गणमान्य उपस्थिति इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्रीधर पराड़कर, पूर्व सांसद विवेक शेजवलकर, पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद जयभान सिंह पवैया, भाजपा अजा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य क्षेत्र के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत इंदापुरकर, मध्यभारत प्रांत के सह संपर्क प्रमुख नवल शुक्ला, कुटुंब प्रबोधन संयोजक अशोक पाठक, देवेंद्र गुर्जर, साहित्य परिषद के प्रांत अध्यक्ष डॉ. कुमार संजीव, विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी, विभाग प्रचारक ललित कुमार, सह विभाग कार्यवाह मुनेंद्र कुशवाह, विभाग सह संपर्क प्रमुख गिर्राज दानी, शशिकांत शर्मा, मध्य भारत शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र बादिल, सचिव प्रो. राजेंद्र वैद्य, जिलाधीश रुचिका चौहान पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना, उप महानिरीक्षक अमित सांघी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह यादव, लोकायुक्त एसपी निरंजन शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश राजौरिया, वेदप्रकाश शर्मा, महेंद्र सिंह यादव, पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, पूर्व विधायक मुन्नालाल गोयल सहित बड़ी संख्या में राजनेता, समाजसेवी, व्यापारीगण, प्रबुद्धजन आदि उपस्थित रहे।
सरस्वती पूजन से हुआ शुभारंभ
रंगोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभसरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवल करके किया। स्वदेश के प्रबंध संचालक यशवर्धन जैन, संचालक गण महेंद्र अग्रवाल, अजय बंसल, समूह संपादक अतुल तारे, सीईओ जितेंद्र शर्मा, महाप्रबंधक अशोक भूराडिया एवं आमंत्रित कवियों ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का
शुभारंभ किया। तत्पश्चात मंचासीन कवि तथा कवयित्रियों का शॉल-श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रामकिशोर उपाध्याय एवं आभार स्थानीय संपादक दिनेश चन्द्र राव ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में एमरोल्ड इंडस्ट्रीज, एमरोल्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, आनंद अग्रवाल रंगवाले व माधव मंगलम गार्डन सहयोगी रहे।
स्वदेश ने विचारों से कभी समझौता नहीं किया
इसके बाद स्वदेश के राज्य ब्यूरो प्रमुख अनुराग उपाध्याय ने स्वदेश की विकास यात्रा और उसके स्वरूप में हुए सकारात्मक परिवर्तनों से सभी को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आज स्वदेश के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में 17 संस्करण प्रकाशित हो रहे हैं। आगामी समय में छिंदवाड़ा में भी स्वदेश प्रकाशित होगा। हिंदी और अंग्रेजी वेबसाइट के अलावा भोपाल में एक डिजिटल स्टूडियो भी है। उन्होंने कहा कि स्वदेश ने आपातकाल सहित कई बार विषम परिस्थितियों में भी अपने विचारों से कभी समझौता नहीं किया और आगे भी नहीं झुकेगा।