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सुप्रीम कोर्ट के जज अब सार्वजनिक करेंगे अपनी संपत्ति की जानकारी, न्यायालय की बैठक में लिया निर्णय

सुप्रीम कोर्ट के जज अब सार्वजनिक करेंगे अपनी संपत्ति की जानकारी, न्यायालय की बैठक में लिया निर्णय

सुप्रीम कोर्ट के जज अब सार्वजनिक करेंगे अपनी संपत्ति की जानकारी न्यायालय की बैठक में लिया निर्णय

Supreme Court Judges will Declare their Assets Publicly : दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ज्यूडिशियरी में पारदर्शिता और जनता के भरोसे को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोर्ट के सभी जजों ने पदभार ग्रहण करते समय अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने का फैसला लिया है। यह निर्णय 1 अप्रैल 2025 को हुई फुल कोर्ट मीटिंग में सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना की अध्यक्षता में 34 जजों ने हिस्सा लिया। इस कदम का उद्देश्य ज्यूडिशियरी की विश्वसनीयता को बढ़ाना और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश देना है।

संपत्ति घोषणा की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट में जजों की निर्धारित संख्या 34 है, हालांकि वर्तमान में 33 जज कार्यरत हैं, क्योंकि एक पद रिक्त है। इनमें से 30 जजों ने अपनी संपत्ति का घोषणा पत्र पहले ही कोर्ट को सौंप दिया है, लेकिन यह जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। अब नई नीति के तहत जजों की संपत्ति से संबंधित विवरण सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। हालांकि, यह घोषणा स्वैच्छिक होगी, जिसका मतलब है कि जज अपनी इच्छा से इस जानकारी को साझा कर सकते हैं। यह कदम ज्यूडिशियरी में पारदर्शिता के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा से जुड़े एक विवाद के बाद आया है, जो हाल ही में चर्चा में आए हैं। 14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगने की घटना हुई थी। फायर सर्विस टीम ने मौके से अधजले नोट बरामद किए, जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ा। इस घटना ने ज्यूडिशियरी पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जजों की संपत्ति के स्रोतों पर जनता के बीच बढ़ते संदेह को दूर करने की दिशा में है।

 जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर

कैश विवाद में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया है। यह ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ है। हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया गया है कि जस्टिस वर्मा को किसी भी न्यायिक कार्य की जिम्मेदारी न सौंपी जाए, जब तक कि जांच पूरी न हो जाए। यह कदम विवाद को और बढ़ने से रोकने के लिए उठाया गया है।

जांच कमेटी का गठन

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए एक आंतरिक जांच कमेटी का गठन किया है, जिसमें तीन जज शामिल हैं। कमेटी जस्टिस वर्मा से संबंधित सभी पहलुओं की जांच कर रही है, जिसमें नकदी के स्रोत और आग लगने के कारण शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, जस्टिस वर्मा की कमेटी के सामने जल्द ही पेशी हो सकती है, जहां उन्हें अपनी सफाई पेश करनी होगी। जांच की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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