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अब इस तारीख को होगी अगली सुनवाई; हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगा जवाब

अब इस तारीख को होगी अगली सुनवाई; हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगा जवाब

अब इस तारीख को होगी अगली सुनवाई हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगा जवाब

Krishna Janmabhoomi Dispute: मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसके बाद अब अगली सुनवाई की तारीख 4 जुलाई को होगी। 

क्या हुआ कोर्ट में?


इलाहाबाद हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने इस मामले से जुड़ी कुल 18 याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं में हिंदू पक्ष की तरफ से यह मांग की गई है कि शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किया जाए और वह जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंपी जाए। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि मस्जिद एक वैध धार्मिक स्थल है और इसके निर्माण को लेकर हिंदू पक्ष के पास कोई ठोस सबूत नहीं है।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने कुछ याचिकाओं पर दाखिल अर्जियों पर गौर किया और दोनों पक्षों से उनके जवाब मांगे है। इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 4 जुलाई तय की है।

जानिए क्या है विवाद?


यह विवाद मथुरा की कुल 13.37 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है। इस जमीन का बड़ा हिस्सा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर के अंदर आता है, जबकि बाकी 2.37 एकड़ जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद स्थित है।

हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद जिस स्थान पर बनी है, वहीं भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थान मौजूद है। उनका कहना है कि मुगल काल में वहां मौजूद प्राचीन मंदिर को तोड़कर उस पर मस्जिद का निर्माण किया गया था।

दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष इस दावे को सिरे से नकारता है और इसे ऐतिहासिक तथ्यों और दस्तावेजों के विरुद्ध बताता है। उनका कहना है कि मस्जिद एक वैध जगह पर है, जिसे लेकर किसी भी तरह का विवाद नहीं होना चाहिए।

अयोध्या की तर्ज पर चल रही है सुनवाई


इलाहाबाद हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई अयोध्या विवाद की तरह कर रहा है। कोर्ट सभी याचिकाओं पर एक साथ विचार कर रहा है ताकि पूरे मामले का हल एक साथ निकल सके। यह फैसला आने वाले समय में इस विवाद की दिशा तय कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है राय

इस विवाद से जुड़ी एक याचिका पहले सुप्रीम कोर्ट में भी गई थी। वहां कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया और हिंदू पक्ष को याचिका में बदलाव करने और एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) को मामले में पक्षकार बनाने की इजाजत दी थी।

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