सिंहस्थ 2028 को लेकर डीजीपी कैलाश मकवाना ने युवा पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने की सलाह दी। साइबर अपराध, सोशल मीडिया और तकनीक के दौर में स्किल डेवलपमेंट पर जोर
वर्तमान समय में पुलिसिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों को लगातार साइबर फील्ड में अपनी स्किल डेवलपमेंट पर ध्यान देना होगा। साथ ही तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग में दक्ष होना भी जरूरी है।
पुलिस अधिकारी सिंहस्थ 2028 के परिप्रेक्ष्य में सामने आने वाली संभावित सुरक्षा, साइबर और संगठित अपराध से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए अभी से तैयार रहें। यह बात पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कही।वे शुक्रवार को भौंरी स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी में आयोजित मप्र पुलिस के 43वें बैच के 17 परिवीक्षाधीन उप पुलिस अधीक्षकों के दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।
पुलिस महानिदेशक ने कहा
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि आज धार्मिक आयोजनों, सामुदायिक मुद्दों या कानून-व्यवस्था से जुड़ा कोई भी विषय सोशल मीडिया के माध्यम से तुरंत व्यापक रूप ले लेता है। ऐसे में जनता की अपेक्षा रहती है कि पुलिस तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई करे।उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी को अपने चरित्र, अनुशासन और निर्णय क्षमता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “सेवा काल में की गई एक छोटी सी लापरवाही भी पूरे जीवन पर दाग बन सकती है, इसलिए नियमों के अनुरूप ही कार्य करें।”
सोशल मीडिया की सक्रियता के इस दौर में छोटी सी घटना भी वायरल हो सकती है, इसलिए सजगता, संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया बेहद आवश्यक है।दीक्षांत समारोह में प्रशिक्षु अधिकारियों ने अपने प्रशिक्षण काल के अनुभव भी साझा किए। कार्यक्रम में विशेष पुलिस महानिदेशक रवि कुमार गुप्ता, पुलिस आयुक्त संजय कुमार, डीजीपी के पीएसओ विनीत कपूर सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।