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सिंधिया विवाद में समझौता संभव

सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद में समझौते की राह साफ, कोर्ट ने 20 जुलाई तय की अगली सुनवाई

सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद में समझौते की राह साफ होती दिख रही है। जिला न्यायालय ने 20 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है।


सिंधिया राजघराने के संपत्ति विवाद में समझौते की राह साफ कोर्ट ने 20 जुलाई तय की अगली सुनवाई 

देश के चर्चित सिंधिया राजघराने की हजारों करोड़ रुपये मूल्य की पैतृक संपत्तियों के बंटवारे से जुड़े चार दशक पुराने विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि, बुधवार को जिला न्यायालय में प्रस्तावित समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं होने और सभी पक्षकारों के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित नहीं हो पाने के कारण न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई निर्धारित की है।

संपत्ति विवाद की शुरुआत वर्ष 1980 में हुई

सिंधिया राजपरिवार में संपत्ति विवाद की शुरुआत वर्ष 1980 में तत्कालीन राजमाता विजयाराजे सिंधिया और उनके पुत्र स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के बीच हुई थी। दोनों के निधन के बाद यह विवाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीन बुआओं वसुंधरा राजे सिंधिया, यशोधरा राजे सिंधिया तथा ऊषा राजे राणा के बीच विभिन्न न्यायालयों में जारी रहा।

विवाद में ग्वालियर, दिल्ली, मुंबई, उज्जैन, शिवपुरी, चंदेरी सहित कई शहरों की पैतृक संपत्तियां शामिल हैं। वर्ष 2010 में तीनों बहनों ने बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार मिलने के आधार पर जिला न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया था। इसके जवाब में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने अधिकारों को लेकर अलग याचिका दायर की। दोनों मामले वर्ष 2017 तक जिला न्यायालय में लंबित रहे और बाद में सिविल रिवीजन के तहत उच्च न्यायालय पहुंचे।अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विशाल अखंड की अदालत में दोनों पक्षों की ओर से समझौते संबंधी आवेदन प्रस्तुत किया गया।

आपसी सहमति से समाधान करने की सलाह

जून 2026 के अंत में जिला न्यायालय ने इस पारिवारिक विवाद का समाधान आपसी सहमति से करने की सलाह देते हुए पक्षकारों को तीन माह के भीतर समझौते की अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसी के बाद दोनों पक्ष समझौते के लिए सहमत हुए और उसका प्रारूप न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते का मूल आधार 'जो जहां काबिज, वही संपत्ति उसी की' रखा गया है। यदि इस पर न्यायालय की अंतिम मुहर लग जाती है, तो ग्वालियर, दिल्ली, मुंबई, पुणे सहित विभिन्न अदालतों में लंबित एक दर्जन से अधिक मुकदमों का पटाक्षेप हो जाएगा।

सिंधिया पॉटरीज परिसर की कोठियां भी उपयोग में

राजपरिवार की अधिकांश संपत्तियां सीधे व्यक्तिगत स्वामित्व में न होकर सर जयाजीराव ट्रस्ट, कृष्ण माधव ट्रस्ट तथा सिंधिया इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाओं के माध्यम से संचालित होती हैं। दिल्ली स्थित सिंधिया पॉटरीज परिसर की कोठियां भी लंबे समय से परिवार के विभिन्न सदस्यों के उपयोग में हैं।समझौते में राजमाता विजयाराजे सिंधिया की अत्यंत प्रिय धरोहर माने जाने वाले पन्ने के शिवलिंग के स्वामित्व का भी उल्लेख है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।न्यायालय ने मूल रिकॉर्ड तलब किया है, जिसके बाद अब अगली सुनवाई में समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है।

 

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