सिंहस्थ 2028 के लिए AI आधारित भीड़ नियंत्रण सिस्टम तैयार किया जा रहा है। 30 करोड़ श्रद्धालुओं के अनुमान के बीच संयुक्त कंट्रोल रूम और 3 गुना अधिक ट्रेनें चलेंगी।
सिंहस्थ 2028 के सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित आयोजन के संबंध में कार्य योजना बनाई गई है। सिंहस्थ का आयोजन 9 अप्रैल से 8 मई तक प्रस्तावित है। इसमें लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। शाही स्नान के अवसरों पर एक ही दिन में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है।यह जानकारी बुधवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में पुलिस, रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समन्वय बैठक में दी गई।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी एवं एआई आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम, बैकअप पावर, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, साइबर सुरक्षा, वेंडर मैनेजमेंट एवं एक्सेस कंट्रोल को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही संयुक्त प्रशिक्षण, मेडिकल टीमों की उपलब्धता एवं त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी।
पिछले सिंहस्थ की तुलना में तीन गुना अधिक चलेंगी ट्रेनें
बैठक में आगामी सिंहस्थ के दौरान संभावित अत्यधिक भीड़, यातायात प्रबंधन, रेल संचालन, सुरक्षा व्यवस्था तथा आधारभूत संरचना के विकास को लेकर चर्चा की गई। बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि आगामी सिंहस्थ 2028 के दृष्टिगत रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ एवं जिला प्रशासन के मध्य बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने प्रयागराज महाकुंभ के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक रहने की संभावना है, जिसके लिए पहले से ही व्यवस्थित एवं चरणबद्ध योजना बनाई जा रही है।
रेल से ढाई करोड़ से अधिक यात्रियों के आने की संभावना
उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों के विश्लेषण के आधार पर इंदौर-देवास मार्ग से सर्वाधिक आवागमन तथा रेलवे के माध्यम से 2 से 2.5 करोड़ यात्रियों के आगमन की संभावना को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसमें नए फुटओवर ब्रिज, सैटेलाइट स्टेशन विकास एवं त्रिस्तरीय पार्किंग जैसी सुविधाओं की आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी।ट्रेन संचालन के लिए विशेष रणनीति के तहत 2016 की तुलना में तीन गुना अधिक विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसके साथ ही पेंडुलम मूवमेंट आधारित शॉर्ट-डिस्टेंस मेला ट्रेनें भी चलाई जाएंगी।
भीड़ प्रबंधन को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
भीड़ प्रबंधन के लिए संयुक्त कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा तथा शाही स्नान एवं अन्य प्रमुख अवसरों पर विशेष ट्रैफिक एवं भीड़ नियंत्रण योजना तैयार की जाएगी।उन्होंने स्पष्ट किया कि क्राउड मैनेजमेंट के तहत एंट्री एवं एग्जिट मार्ग अलग-अलग रखे जाएं और अंतिम समय में प्लेटफॉर्म परिवर्तन से बचा जाए।
भीड़ का सटीक आकलन सबसे महत्वपूर्ण
पुलिस महानिदेशक ने उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल के साथ-साथ ओंकारेश्वर रोड एवं सीहोर क्षेत्र के स्टेशनों को भी विशेष रूप से ध्यान में रखने के निर्देश दिए।उत्तरप्रदेश डीजी (रेल) प्रकाश डी. ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव साझा करते हुए कहा कि बड़े आयोजनों में भीड़ का सटीक आकलन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।डीजी आरपीएफ सोनाली मिश्रा ने कहा कि सिंहस्थ जैसे आयोजन में विभिन्न रेलवे जोनों, विशेष रूप से वेस्टर्न, वेस्ट सेंट्रल एवं सेंट्रल रेलवे के मध्य सुदृढ़ समन्वय अत्यंत आवश्यक है।बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसाई मनोहर, राजाबाबू सिंह, राकेश गुप्ता एवं संबंधित जिलों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र में मेला विकसित किया जा रहा है। घाटों का विस्तार लगभग 37 किलोमीटर तक किया जा रहा है। वैज्ञानिक आकलन के अनुसार प्रति एक किलोमीटर घाट पर निर्धारित समय में हजारों श्रद्धालुओं के स्नान की क्षमता विकसित कर बड़े स्तर पर भीड़ प्रबंधन की योजना बनाई गई है।