मध्य प्रदेश के श्योपुर में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से 4 महिलाओं की मौत और 26 लोग घायल हुए। कई की हालत गंभीर, ग्वालियर रेफर किया गया। मुख्यमंत्री ने मुआवजे की घोषणा की।
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में गुरुवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से 4 महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 26 लोग घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया।यह हादसा विजयपुर थाना क्षेत्र के खितरपाल गांव के पास हुआ, जब ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। ट्रॉली में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे सवार थे।
भात कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे लोग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सभी लोग बीरपुर थाना क्षेत्र के घूंघस गांव से झारबडौदा गांव में आयोजित भात कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में ट्रैक्टर असंतुलित हो गया और ट्रॉली पलट गई।मृतकों की पहचान सरोज गुर्जर, सुनैना गुर्जर, सीमा गुर्जर और गीता राव के रूप में हुई है।
हादसे के बाद मची चीख-पुकार, लोगों ने खुद संभाली स्थिति
हादसे के तुरंत बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत कार्य शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लोग मदद के लिए चिल्लाते रहे। क्रेन का इंतजार किए बिना स्थानीय लोगों ने हाथों से ही पलटी हुई ट्रॉली को सीधा किया और उसमें फंसे लोगों को बाहर निकाला।घायलों को आसपास के वाहनों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया।
कई गंभीर, 4 को ग्वालियर रेफर
प्रशासन के अनुसार, घायलों में कई की हालत गंभीर बनी हुई है। 4 गंभीर घायलों को ग्वालियर रेफर किया गया है, जबकि अन्य का इलाज विजयपुर के सिविल अस्पताल में जारी है।एसडीएम अभिषेक मिश्रा ने बताया कि हादसे के बाद पांच लोगों की स्थिति गंभीर थी, जिनमें से चार को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक, मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पूर्व वनमंत्री रामनिवास रावत, एसडीएम अभिषेक मिश्रा और पुलिस अधिकारी राहत और बचाव कार्य की निगरानी करते रहे।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉली के उपयोग और ओवरलोडिंग को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे वाहनों में यात्रियों को ले जाना जोखिम भरा होता है और इस पर सख्त निगरानी की आवश्यकता है।