सतना में 20 साल से बंद पड़े पट्रोल पंप टैंक की सफाई के दौरान दो कर्मचारी बेहोश हो गए। फायर सेफ्टी टीम ने रेस्क्यू कर जान बचाई। घटना से इंडस्ट्रियल सेफ्टी पर सवाल उठे।
सतना। शहर के कोलगवां थाना क्षेत्र स्थित सेमरिया चौराहा के पास सोमवार को बड़ा हादसा टल गया। चौरसिया पेट्रोल पंप के वर्षों से बंद पड़े अंडरग्राउंड पेट्रोल टैंक की सफाई करने दो कर्मचारी उतरे थे। वह सफाई कर पाते उससे पहले ही अचानक बेहोश हो गए। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की फायर सेफ्टी टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान चलाकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला।
20 साल से बंद टैंक की हो रही थी सफाई
जानकारी के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने लंबे समय से बंद पड़े टैंक को दोबारा उपयोग में लाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी सिलसिले में जबलपुर डिपो नीरज और प्रशांत सिंह तोमर को सफाई करने कार्य के लिए भेजा गया था। दोनों कर्मचारी टैंक के अंदर उतरे, लेकिन कुछ ही देर में अचेत हो गए।
ऑक्सीजन कमी की आशंका
प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि टैंक के भीतर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम था। या फिर जहरीली गैस जमा हो गई थी। इसकी वजह से दोनों कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ गई और वह टैंक में ही बेहोश हो गए। उनको बाहर निकालने के बाद एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर उनकी निगरानी में इलाज कर रहे हैं।
रेस्क्यू में टीम की अहम भूमिका
घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की फायर सेफ्टी टीम ने बिना देर किए रेस्क्यू शुरू किया और दोनों कर्मचारियों को अचेत हालत में बाहर निकाला। इस दौरान एसडीआरएफ की टीम मौके पर नहीं पहुंची। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर भी सवाल उठे। हालांकि समय पर किए गए रेस्क्यू से बड़ा हादसा टल गया।
सुरक्षा मानकों की होगी जांच
घटना के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि टैंक की सफाई शुरू करने से पहले गैस परीक्षण, ऑक्सीजन स्तर की जांच और सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था की गई या नहीं की गई थी। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा प्रक्रियाओं के पालन की भी पड़ताल की जाएगी।