नर्मदापुरम में संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर आधारित फिल्म ‘शतक’ का भव्य प्रदर्शन। स्वयंसेवकों और नागरिकों की बड़ी भागीदारी, राष्ट्रभाव से ओतप्रोत माहौल।
नर्मदापुरमनगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्षों की गौरवगाथा पर आधारित फिल्म शतक का विशेष प्रदर्शन नगर के प्रसिद्ध मीनाक्षी सिनेमाघर में किया गया। इस अवसर पर नगर और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयंसेवक, संघ के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा अनेक गणमान्य नागरिक परिवार सहित उपस्थित रहे।
देशभर में 20 फरवरी को प्रदर्शित हुई इस फिल्म में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, उसके संगठनात्मक विकास, सेवा कार्यों तथा राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को पहली बार बड़े पर्दे पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है।फिल्म के माध्यम से संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन के प्रेरणादायी प्रसंगों, उनके त्याग, दूरदृष्टि और संगठन निर्माण की भावना को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है।
तिलक व राष्ट्रगान के साथ हुआ शुभारंभ
फिल्म प्रदर्शन से पूर्व सिनेमा हॉल के प्रवेश द्वार पर सभी अतिथियों और स्वयंसेवकों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। यह दृश्य अनुशासन, आत्मीयता और संगठनात्मक संस्कार का प्रतीक नजर आया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसके बाद पूरा वातावरण देशभक्ति के भाव से ओत-प्रोत हो गया।
व्यापक संपर्क के बाद हुआ आयोजन
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूर्व में नगर के सभी बस्ती प्रमुखों से संपर्क कर चर्चा की गई थी। बस्ती प्रमुखों ने अपने-अपने क्षेत्रों के स्वयंसेवकों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर उन्हें परिवार सहित इस विशेष प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की गरिमामयी उपस्थिति रही और आयोजन उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।
प्रार्थना के साथ समापन
फिल्म समाप्ति के उपरांत सभी स्वयंसेवकों ने संघ की प्रार्थना की। अनुशासन और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण इस आयोजन को उपस्थित नागरिकों ने सराहा।
दर्शकों ने सराहा प्रस्तुतिकरण
फिल्म के प्रदर्शन के दौरान समय-समय पर ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष से पूरा सिनेमा हॉल गूंज उठा। दर्शकों ने फिल्म में संघ के विभिन्न कालखंडों, सेवा कार्यों, सामाजिक समरसता के प्रयासों और राष्ट्रीय चेतना के विस्तार को प्रभावशाली बताया।कार्यक्रम के बाद उपस्थित स्वयंसेवकों और नागरिकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि संघ को सही अर्थों में समझना हो तो शाखा में जाना चाहिए, लेकिन इस फिल्म के माध्यम से भी संघ के विचार और कार्य पद्धति को समझने में काफी मदद मिलती है।