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2027 से संघ में नई संगठनात्मक रचना लागू होगी, प्रांत की जगह होंगे राज्य प्रचारक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 2027 से संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करेगा। प्रांत व्यवस्था खत्म कर राज्य प्रचारक प्रणाली लागू होगी, मध्य क्षेत्र में 9 संभाग केंद्र बनाए जाएंगे।


2027 से संघ में नई संगठनात्मक रचना लागू होगी प्रांत की जगह होंगे राज्य प्रचारक

मध्य क्षेत्र में संघ के नौ संभाग केंद्र बनेंगे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। संघ की हाल ही में हरियाणा के समालखा में हुई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस पर मुहर लग चुकी है, तद्नुसार 2027 से इस बदलाव को लागू कर दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश में संघ की संगठनात्मक दृष्टि से अभी मौजूद मालवा, महाकौशल और मध्यभारत तीन प्रान्त कार्यशील हैं, लेकिन अब प्रतिनिधि सभा में हुए निर्णय के अनुसार तीन प्रांतों की रचना का अस्तित्व नहीं रहेगा। संघीय व्यवस्था के अनुरूप जो राज्यों की संरचना है, कमोबेश संघ का संगठनात्मक ढांचा भी अब वैसा ही होगा। अब राज्य स्तर पर प्रदेश समिति होगी। इसमें प्रान्त प्रचारक और कार्यवाह होंगे। प्रांतों की जगह अब संभाग होंगे, जबकि क्षेत्र की रचना यथावत रहेगी। मध्य क्षेत्र में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य पूर्व की तरह ही शामिल होंगे।

मध्यभारत प्रान्त के प्रान्त संघचालक अशोक पांडे ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि मध्य क्षेत्र में अब नौ संभाग होंगे। इनमें सात संभाग मध्यप्रदेश और दो संभाग छत्तीसगढ़ से होंगे, जबकि देशभर में करीब 80 नए संभाग गठित किए जाएंगे। जिला और तहसील स्तर की रचना पूर्ववत रहेगी। श्री पांडे ने कहा कि संघ का मानना है कि इस बदलाव से संगठन में कामकाज तेज होगा, फैसले जल्दी लिए जा सकेंगे और युवा कार्यकर्ताओं को ज्यादा जिम्मेदारी मिलेगी। पत्रकारवार्ता के दौरान प्रांत प्रचार प्रमुख अखिलेश श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।

ये नौ शहर बनेंगे मप्र में संघ के संभागीय केंद्रः प्रदेश में इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, खंडवा और नर्मदापुरम जैसे शहर संभागीय व्यवस्था के मुख्य केंद्र होंगे। यहीं से संबंधित संभाग का संचालन किया जाएगा। मध्यक्षेत्र के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में भी कुल 2 संभाग होंगे। सम्मिलित रूप से मध्य क्षेत्र में संभाग की संख्या 9 रहेगी।

अब संभाग प्रचारक होंगे

मध्यप्रदेश में तीन प्रांतों की रचना में बदलाव होने के साथ ही प्रांत प्रचारक और उनकी कार्यकारिणी की रचना भी अस्तित्व में नहीं रहेगी। अब पूरे राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक नियुक्त किया जाएगा, जो संगठन की जिम्मेदारी संभालेगा। नई व्यवस्था में हर संभाग में एक प्रचारक के साथ पूरी कार्यकारिणी बनाई जाएगी, जिसमें प्रचारक संघचालक, कार्यवाह सहित पूरी कार्यकारिणी होगी।


 

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