मध्य भारत प्रांत में RSS की 3842 शाखाएं सक्रिय हैं। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में लाखों लोगों की भागीदारी, सेवा और सामाजिक अभियानों में भी तेजी देखी जा रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य भारत प्रांत में संघकार्य तेजी से विस्तार कर रहा है। शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रमों में समाज की सज्जनशक्ति ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की है। प्रांत में वर्तमान में 2481 स्थानों पर 3842 शाखाएं संचालित हो रही हैं.
प्रांत संघचालक अशोक पांडे ने संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में प्रस्तुत प्रान्त के वार्षिक प्रतिवेदन की जानकारी देते हुए बताया कि 3842 शाखाओं में 37 शहरी स्थानों पर 544 शाखाएं तथा 2444 ग्रामीण स्थानों पर 3298 शाखाएं चल रही हैं। इसके अतिरिक्त 689 स्थानों पर 736 साप्ताहिक मिलन भी आयोजित किए जा रहे हैं। सेवा कार्यों के अंतर्गत 271 सेवा उपक्रम संचालित हैं। संघ द्वारा चिन्हित 1013 सेवा बस्तियों में से 367 में शाखाएं संचालित हो रही हैं, जबकि 970 बस्तियों में विभिन्न सेवा गतिविधियां चल रही हैं और 611 बस्तियों में स्वयंसेवकों का नियमित संपर्क बना हुआ है।
प्रशिक्षण वर्गों में हजारों स्वयंसेवकों की भागीदारीः संघ के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत 179 प्रारंभिक वर्गों में 8021 स्वयंसेवक, 61 प्राथमिक वर्गों में 3485 स्वयंसेवक तथा 15 दिवसीय संघ शिक्षा वगों में 589 (सामान्य) और 184 (विशेष) स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया.
समाज परिवर्तन के विविध प्रयासः संघ स्वयंसेवक समाज परिवर्तन के विभिन्न कार्यों में सक्रिय हैं। प्रांत में 78 बाल गोकुलम्, 9 अध्ययन केंद्र और 13 मासिक कुटुंब मिलन संचालित हो रहे हैं। ग्वालियर में नशामुक्ति और सिंगल यूज प्लास्टिक के विरुद्ध अभियान चलाया गया, जबकि लहार क्षेत्र में व्यसन मुक्ति अभियान के तहत 80 लोगों ने नशा छोड़ा और मदनपुरा गांव को शराब मुक्त बनाया गया। शिवपुरी में प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा सीहोर के जावर क्षेत्र में गोवंश के लिए रात्रि विश्राम गृह जैसी पहले भी की गई हैं। 'एक घर एक रोटी' अभियान के माध्यम से समाज को गौसंरक्षण से जोड़ा जा रहा है।
2481 स्थानों पर संचालित हो रही हैं 3842 शाखाएं
शताब्दी वर्ष में व्यापक आयोजनः संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत विजयादशमी उत्सव, गृह संपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन और प्रमुखजन गोष्ठियों का आयोजन किया जा चुका है। यह कार्यक्रम विजयादशमी 2026 तक जारी रहेंगे। प्रांत में 2124 स्थानों पर विजयादशमी उत्सव आयोजित हुए, जिनमें 2.80 लाख से अधिक स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। वहीं 1818 स्थानों पर पथ संचलन निकाले गए, जिनमें 2.73 लाख स्वयंसेवक शामिल हुए।
गृह संपर्क अभियान बना जनसंपर्क का माध्यमः शताब्दी वर्ष के अंतर्गत चलाए गए गृह संपर्क अभियान में 80 हजार स्वयंसेवकों ने 27 लाख से अधिक परिवारों से संपर्क किया। साथ ही 7922 प्रमुखजनों से संवाद स्थापित किया गया। इस दौरान सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के भोपाल प्रवास के दौरान 'चाय पर चर्चा' जैसे कार्यक्रमों ने समाज के प्रबुद्ध वर्ग को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।