ग्वालियर में ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन हुआ। चरित्र निर्माण, रोजगारपरक शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने पर रहेगा विशेष जोर।
ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन, चरित्र निर्माण और रोजगारपरक शिक्षा पर रहेगा जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं वरिष्ठ प्रचारक सुरेश सोनी ने कहा कि केवल सड़कों, भवनों और अधोसंरचनाओं का निर्माण ही विकास नहीं है। वास्तविक विकास वह है, जिसमें मनुष्य और परिवेश दोनों का संतुलित विकास हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो मनुष्य को अधिक संवेदनशील, विचारवान और व्यापक दृष्टिकोण वाला बनाए-इसी उद्देश्य से इस विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है।

श्री सोनी सोमवार को सुबह शिवपुरी लिंक रोड स्थित ग्राम बेला में मध्यभारत शिक्षा समिति के प्रस्तावित आवासीय ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमि पूजन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उद्बोधन दे रहे थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव थे, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य भारत प्रांत के संघचालक अशोक पाण्डेय ने की। विशेष अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट उपस्थित थे। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष प्रो.राजेंद्र बादिल भी मंचासीन रहे।
श्री सोनी ने कहा कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी नालंदा और तक्षशिला की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विश्वभर में भारतीय ज्ञान का परचम फहराएंगे। उन्होंने नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका मूल भाव यही है कि युवा ज्ञान, चरित्र और संस्कारों से संपन्न होकर आत्मनिर्भर बनें तथा दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित करें। उन्होंने आधुनिक तकनीक और उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता जताई और कहा कि एआई और गैजेट्स का उपयोग आवश्यक है, लेकिन इससे मनुष्य का बौद्धिक कौशल कमजोर नहीं होना चाहिए। चेतन और अचेतन के समन्वय से ही एक बेहतर परिवार, समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण जैसी चुनौतियों का समाधान भी इसी संतुलित दृष्टि से निकलेगा।
श्री सोनी ने आगे कहा कि हमारी दृष्टि ऐसी होनी चाहिए जो आधुनिकता और मूल परंपरा के बीच समन्वय स्थापित करे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि मनुष्य का अंतिम लक्ष्य 'नर से नारायण' बनने का है, इसलिए संवेदनशीलता और मानवीयता को जीवित रखना अनिवार्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऋषि गालव विश्वविद्यालय एक आदर्श संस्थान के रूप में स्थापित होगा। कार्यक्रम का संचालन अर्चना शमां एवं नीति पांडेय ने एवं आभार डॉ. राजेन्द्र वैद्य ने व्यक्त किया।
शिक्षा के केंद्र होने के साथ राष्ट्र निर्माण के स्थल होते हैं विश्वविद्यालयः मुख्यमंत्री
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ग्वालियर के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण है और इस विश्वविद्यालय की स्थापना एक नया इतिहास रचेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं होते, बल्कि राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण स्थल भी होते हैं। यह विश्वविद्यालय आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, संस्कृति और कौशल से सुसज्जित करेगा। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस विश्वविद्यालय की स्थापना में हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक सदाशिव गणेश गोखले के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि 1941 में शुरू हुआ यह शैक्षणिक अभियान आज एक बड़े स्वरूप में विकसित हो चुका है और अब विश्वविद्यालय की स्थापना इसकी नई उपलब्धि है। उन्होंने यह भी बताया कि यहां भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा का समन्वय होगा।
गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगा विश्वविद्यालय - परमार
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की स्थापना है। भारतीय परंपरा में शिक्षा समाज का दायित्व रही है और प्राचीन विश्वविद्यालयों ने आदर्श नागरिकों का निर्माण किया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विश्वविद्यालय भी उसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएगा।
आदर्श नागरिकों का निर्माण करेगा विवि - पाण्डेय
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मध्य भारत प्रांत संघचालक अशोक पाण्डेय ने कहा कि कोई भी देश केवल सैन्य शक्ति से महान नहीं बनता, बल्कि शिक्षा और संस्कार ही उसे वास्तविक महानता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि संस्कारहीन शिक्षा निष्प्राण होती है और विश्वविद्यालय का उद्देश्य आदर्श नागरिकों का निर्माण करना है।
सर्वांगीण विकास पर देंगे ध्यान - बांदिल
मध्य भारत शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र बादिल ने बताया कि विश्वविद्यालय का मुख्य फोकस चरित्र निर्माण के साथ रोजगारपरक शिक्षा पर रहेगा। यहां आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब और अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। साथ ही छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि यह विश्वविद्यालय लगभग 55 बीघा भूमि पर करीब 110 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होगा। प्रारंभिक चरण में लगभग 30 करोड रुपये व्यय किए जाएंगे और लक्ष्य है कि 18 जुलाई 2027 (गुरु पूर्णिमा) से शैक्षणिक सत्र प्रारंभ हो। पूर्ण निर्माण तीन वर्षों में पूरा होने की संभावना है।
कार्यक्रम में संत कृपाल सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्रीधर पराड़कर, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव, पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा व लाल सिंह आर्य, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मध्य क्षेत्र के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत इंदापुरकर, मध्य भारत प्रांत के सह संपर्क प्रमुख नवल शुक्ला, व्यवस्था प्रमुख कमल जैन, कुटुंब प्रबोधन प्रांत संयोजक अशोक पाठक, शिक्षक कार्य प्रांत प्रमुख देवेंद्र गुर्जर, ग्वालियर विभाग संघचालक प्रहलाद सबनानी, वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश तोमर, आईआईटीटीएम के निदेशक प्रो. आलोक शर्मा, कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन सिंह भदौरिया, भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष प्रेम सिंह राजपूत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, प्राचार्य, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।