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Religious Freedom Bill 2026 to Be Tabled in Chhatt

बजट सत्र में पेश होगा कनवर्जन के खिलाफ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026

छत्तीसगढ़ में कनवर्जन रोकने के लिए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 बजट सत्र में पेश होगा। चंगाई सभा पर रोक और जबरन कनवर्जन पर सख्त सजा का प्रावधान


बजट सत्र में पेश होगा कनवर्जन के खिलाफ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026

राज्य में कनवर्जन रोकने के लिए सरकार ने कानून का मसौदा तैयार कर लिया है। सरकार ने इसे धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 नाम दिया है। सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इसे पेश किया जाएगा।शंकर नगर स्थित स्पीकर हाउस में शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि सरकार की तरफ से इस विधेयक को पेश करने की सूचना विधानसभा सचिवालय को दे दी गई है। बताया जा रहा है कि कानून में चंगाई सभा पर रोक और जबरन कनवर्जन पर सजा जैसे कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।

60 दिन पहले देनी होगी सूचना

विधेयक के मसौदे के अनुसार कनवर्जन के लिए 60 दिन पहले प्रशासन को सूचना देनी होगी। चंगाई सभा को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा सकता है। प्रलोभन या दबाव में जबरन कनवर्जन कराने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान किया गया है। नए कानून में कनवर्जन रोकने के लिए पुलिस को व्यापक अधिकार दिए जाने की भी चर्चा है।जबरन कनवर्जन पर सजा समेत कई सख्त प्रावधान किए गए हैं।

9 राज्यों के कानून का अध्ययन, राज्य में 52 बैठकें

कनवर्जन रोकने के लिए विधेयक तैयार करने के दौरान नौ राज्यों में प्रचलित कानूनों का अध्ययन किया गया है। राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में करीब 52 बैठकें हुईं। इन्हीं बैठकों के आधार पर धर्म स्वातंत्र्य विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है।

इस वजह से बनाया गया कानून

राज्य के आदिवासी इलाकों, विशेष रूप से बस्तर, जशपुर और रायगढ़ क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आदिवासियों का ईसाई धर्म में कनवर्जन किया जा रहा है। इसकी वजह से अब विवाद की स्थिति बनने लगी है। कनवर्जन के कारण आदिवासी परंपरा और संस्कृति खतरे में पड़ गई है।2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कनवर्जन को बड़ा मुद्दा बनाया था और सरकार बनने पर इसके खिलाफ कानून लाने का वादा भी किया था।

ऐसे बनेगा कानून

सरकार बजट सत्र में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश करेगी। सदन में सत्ता पक्ष के पास पर्याप्त संख्या बल है, ऐसे में कांग्रेस विरोध भी करती है तो संख्याबल के आधार पर सरकार विधेयक पारित करा लेगी। विधानसभा से कानून पास होने के बाद इसे मंजूरी के लिए राजभवन भेजा जाएगा। राज्यपाल की मुहर लगते ही यह कानून बन जाएगा।दावा किया जा रहा है कि राज्य में लागू होने वाला यह कानून कनवर्जन के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून होगा।