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रायपुर में ट्रैफिक जाम की राहत फाइलों में गुम

रायपुर में ट्रैफिक जाम की राहत फाइलों में गुम

रायपुर में ट्रैफिक जाम की राहत फाइलों में गुम

253 करोड़ के 5 सड़क प्रोजेक्ट 6 साल से अधूरे, मुआवजा और फंड की कमी बनी बड़ी बाधा

शहर में ट्रैफिक दबाव अब लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुका है। सुबह और शाम सड़कों पर भारी जाम लगता है। भीड़ कम करने और यातायात को सुचारु बनाने के लिए पिछले 5-6 सालों में 253 करोड़ रुपए के पांच बड़े सड़क और बायपास प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए थे, लेकिन आज तक ये अधूरे हैं।

क्या है मुख्य वजह?

इसकी दो मुख्य वजह हैं। मुआवजे के लिए फंड नहीं है या शासन स्तर पर फाइलें अटकी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार बार-बार अफसरों और सरकारों के बदलने से इन प्रोजेक्ट्स की फाइलें टेबलों पर अटकी हुई हैं। जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में विवाद भी है। इसके कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। वहीं, जानकारों का कहना है कि यदि ये सभी प्रोजेक्ट पूरे हो जाते हैं तो रायपुर के ट्रैफिक का 30 से 40 प्रतिशत दबाव कम हो जाएगा।

लोगों को कब मिलेगी राहत?

निगम, रेलवे और लोक निर्माण विभागों में इन प्रोजेक्ट्स की फाइलें घूम रही हैं। जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं और जल्द ही काम शुरू किया जाएगा, लेकिन छह साल से लोगों को मिल रही सिर्फ यही उम्मीद अब सवाल बन गई है। आखिर रायपुर को ट्रैफिक जाम से राहत कब मिलेगी?पूर्व के प्रोजेक्ट की जानकारी नहीं है, लेकिन अभी जो प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं, वे सभी प्रक्रियाधीन हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स को समय-सीमा से पहले पूरा करवाने की पूरी कोशिश की जाएगी।

यहां होना था काम

जेई रोड (फूलचौक से तात्यापारा चौक तक) केवल 500 मीटर का यह हिस्सा वर्षों से ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। पिछली सरकार ने 134 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी और भूमिपूजन भी हो गया था, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। मौजूदा सरकार ने भी घोषणा की, पर मुआवजे का मामला अभी तक नहीं सुलझा। नतीजा हर दिन हजारों वाहन चालक इस मार्ग पर घंटों फंसे रहते हैं।

कोटा रोड से स्टेशन एक्सप्रेस वे कनेक्टिविटी

सड़क चौड़ीकरण के लिए 27 करोड़ रुपए की मंजूरी छह माह पहले दी गई थी, लेकिन रेलवे की जमीन और निजी भवनों के मुआवजे को लेकर मामला अटका हुआ है। यह सड़क बनने पर सात वाड़ों के नागरिकों को बड़ी राहत मिलती, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका।

कचना से लाभाडी बायपास रोड

शंकरनगर, मोवा, कचना और सराणा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों के लिए तीन किलोमीटर लंबे इस बायपास का सर्वे पूरा हो गया था। 77 करोड़ रुपए की लागत तय हुई, लेकिन फंड की कमी से फाइल बंद कर दी गई। इस रोड से करीब डेढ़ लाख लोगों को विधानसभा रोड की भीड़ से राहत मिल सकती थी।

फाफाडीह पीली बिल्डिंग रोड चौड़ीकरण

2010 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज भी अधूरा है। कुछ दुकानों के मुआवजे के विवादों में उलझने से सड़क का 50 मीटर हिस्सा नहीं बन पाया। पास में कृषि उपज मंडी होने से भारी वाहनों की आवाजाही लगातार रहती है और जाम की स्थिति बनी रहती है।

टाटीबंध चौक से विश्वविद्यालय तक बायपास रोड

सरौना तक तीन किलोमीटर लंबे इस बायपास पर काम पांच साल पहले शुरू हुआ था। पांच करोड़ की लागत से बनने वाली सड़क भूमि अधिग्रहण विवाद में फंस गई और अब गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।

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