रायपुर: SIR के दौरान मतदाता सूची से 4.09 लाख नाम कटे, जुड़वाने आए सिर्फ 11 हजार आवेदन

रायपुर: SIR के दौरान मतदाता सूची से 4.09 लाख नाम कटे, जुड़वाने आए सिर्फ 11 हजार आवेदन

By : Swadesh Bhopal
रायपुर: SIR के दौरान मतदाता सूची से 4.09 लाख नाम कटे, जुड़वाने आए सिर्फ 11 हजार आवेदन

छत्तीसगढ़ में चल रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के तहत रायपुर जिले से सामने आए आंकड़े गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में जहां एक ओर 4.09 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कट चुके हैं, वहीं नए नाम जुड़वाने के लिए अब तक सिर्फ 11,468 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, एसआईआर से पहले रायपुर जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 18 लाख 92 हजार 523 थी। प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद यह संख्या घटकर 13 लाख 93 हजार 446 रह गई है। यानी एक झटके में लगभग पांच लाख मतदाता सूची से बाहर हो गए। इसके बावजूद नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में लोगों की दिलचस्पी न के बराबर दिखाई दे रही है।

नो-मैपिंग वाले मतदाता भी नहीं दिखा रहे रुचि

वहीं रायपुर जिले में 1 लाख 33 हजार 53 ‘नो-मैपिंग’ मतदाताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। पूरे प्रदेश में नो-मैपिंग वाले मतदाताओं की संख्या 6 लाख 40 हजार 145 है, जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। इन्हें सुनवाई के दौरान निर्धारित तिथि पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है, लेकिन इनमें भी रुचि बेहद कम बताई जा रही है।

23 दिसंबर को प्रकाशित हुई थी सूची

1 जनवरी 2026 की योग्यता तिथि के आधार पर 23 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी।

नाम जुड़वाने के लिए एक दिन शेष

दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के लिए अब सिर्फ एक दिन शेष है। 22 जनवरी तक ही मतदाता नाम जोड़ने, सुधार कराने या आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा। यदि मतदाता सक्रिय नहीं हुए, तो लोकतंत्र की इस बुनियादी प्रक्रिया में उनकी भागीदारी खतरे में पड़ सकती है।

दस्तावेज जमा करने में हो रही जटिलता

नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को भी आसान नहीं माना जा रहा है। आवेदन के साथ वर्ष 2003 की मतदाता सूची का विवरण देना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र और निर्वाचन आयोग द्वारा तय 13 सांकेतिक दस्तावेजों में से किसी एक को संलग्न करना जरूरी है। यही वजह है कि कई मतदाता प्रक्रिया से दूर नजर आ रहे हैं।

आपत्तियों के निराकरण के बाद 21 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। सवाल यह है कि अगर समय रहते मतदाता सक्रिय नहीं हुए, तो इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने का असर भविष्य के चुनावों पर किस तरह पड़ेगा।

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