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Raebareli Vimal Kumar IAS Story

ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने वाले पिता का बेटा बना IAS, रायबरेली के विमल कुमार की संघर्ष भरी कहानी

स्वामीनाथ शुक्ल


ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने वाले पिता का बेटा बना ias रायबरेली के विमल कुमार की संघर्ष भरी कहानी

रायबरेली। आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और लगातार असफलताओं के बावजूद अगर कोई अपने लक्ष्य से नहीं डिगता, तो मंज़िल भी एक दिन झुक जाती है। रायबरेली जिले के चांदेमऊ गांव के रहने वाले विमल कुमार ने यही साबित किया है। सिविल सेवा परीक्षा 2025 में उन्होंने 107वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा कर लिया। 

छोटे से गांव से बड़ी उड़ान

रायबरेली के चांदेमऊ गांव में पले-बढ़े विमल कुमार का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके पिता रामदेव ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। घर की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि बेटा बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग कर सके। लेकिन विमल ने हालात को बहाना नहीं बनाया। उन्होंने किताबों को अपना साथी बनाया और सेल्फ स्टडी के भरोसे तैयारी शुरू कर दी। गांव के माहौल में, सीमित साधनों के बीच पढ़ाई करना आसान नहीं था, मगर उनका लक्ष्य साफ था।

कोचिंग नहीं, सेल्फ स्टडी से मिली सफलता

आज सिविल सेवा की तैयारी करने वाले ज्यादातर छात्र बड़े शहरों की कोचिंग संस्थानों का रुख करते हैं। लेकिन विमल कुमार ने अपने तरीके से तैयारी की। उन्होंने समय का सख्ती से पालन किया, नियमित पढ़ाई की और हर विषय को गहराई से समझने की कोशिश की। उनका मानना है कि अगर सही रणनीति और अनुशासन हो तो बिना कोचिंग के भी इस परीक्षा में सफलता पाई जा सकती है। 

पाँचवें प्रयास में मिली मंज़िल

विमल की यह सफलता एक दिन में नहीं आई। इसके पीछे कई सालों का संघर्ष और धैर्य छिपा है।

असफलता से सीखा, हार नहीं मानी

  • पहले चार प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली

  • दो बार मेन्स परीक्षा तक पहुंचे लेकिन चयन नहीं हुआ

  • दो बार इंटरव्यू तक जाकर भी अंतिम सूची में नाम नहीं आया

कई लोग यहां तक आकर हिम्मत हार जाते हैं। लेकिन विमल ने हर असफलता को अपनी तैयारी का हिस्सा बना लिया। उन्होंने गलतियों को समझा, रणनीति बदली और फिर से तैयारी में जुट गए।

गांव में खुशी का माहौल

जैसे ही विमल के चयन की खबर गांव पहुंची, चांदेमऊ में खुशी का माहौल बन गया। पड़ोसी, रिश्तेदार और गांव के लोग उनके घर पहुंचकर बधाई देने लगे। ईंट भट्ठे पर काम करने वाले उनके पिता के लिए यह पल किसी सपने के सच होने जैसा है। जिन हाथों ने मेहनत से परिवार को संभाला, आज उन्हीं हाथों के बेटे ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में जगह बनाई है।

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